भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर बढ़ता तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान द्वारा पानी रोकने की धमकियों का भारत ने सख्त जवाब दिया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस्लामाबाद सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन करना बंद नहीं करता, तब तक यह संधि रुकी रहेगी। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के मंत्री की चेतावनी का जवाब देते हुए कहा कि भारत का रुख पहले जैसा ही है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
 | 
gyanhigyan

सिंधु जल संधि पर भारत का स्पष्ट रुख

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान द्वारा अपने हिस्से का पानी रोकने की धमकियों को भारत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि इस संधि पर उसका रुख बिल्कुल भी नहीं बदला है। भारत ने अपनी सख्त शर्त दोहराते हुए कहा है कि जब तक इस्लामाबाद सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन करना बंद नहीं करता और इस पर ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक यह संधि पूरी तरह से रुकी रहेगी.


पाकिस्तान की चेतावनी का जवाब

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत का रुख सिंधु जल संधि के संबंध में पहले जैसा ही है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण IWT को रोक दिया गया है। पाकिस्तान को इस आतंकवाद के समर्थन को ठोस रूप से समाप्त करना होगा।"


पाकिस्तान के मंत्री की टिप्पणी

यह टिप्पणी पाकिस्तान के मंत्री मुसादिक मलिक के बयान के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद उन हाथों को "काट देगा" जो संधि के तहत पाकिस्तान के पानी के हिस्से पर दावा करने की कोशिश करेंगे।


1960 की सिंधु जल संधि

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा-पार नदी प्रणाली के बंटवारे और प्रबंधन को नियंत्रित करती है। यह संधि लगभग नौ साल की बातचीत के बाद हुई थी।


भारत के दंडात्मक कदम

भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाने की घोषणा की थी, जिसमें 1960 की सिंधु जल संधि को रोकने का निर्णय भी शामिल था।


तीस्ता नदी परियोजना पर विदेश मंत्रालय का बयान

तीस्ता नदी परियोजना से संबंधित एक सवाल के जवाब में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बांग्लादेश को भारत की विकास सहायता आपसी सहमति पर आधारित है। उन्होंने बताया कि भारत ने पहले ही बांग्लादेश को इस परियोजना पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है।