भारत ने बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज किया

भारत ने बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की अवैध निवास पर निगरानी बढ़ा दी है। नई नीति के तहत, इन लोगों को बांग्लादेश और म्यांमार वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की पहचान करें। इस प्रक्रिया में बायोमीट्रिक पहचान भी शामिल होगी, जिससे पुनर्वापसी में कठिनाई होगी। जानें इस महत्वपूर्ण कदम के पीछे की वजह और इसके प्रभाव।
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भारत ने बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज किया

भारत की नई नीति के तहत बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की निगरानी

भारत ने बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की डिपोर्टेशन प्रक्रिया को तेज किया

बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद, भारत ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या पर निगरानी बढ़ा दी है। इन लोगों को बांग्लादेश और म्यांमार वापस भेजने की योजना बनाई जा रही है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी पूर्व आदेश के अनुसार, बिहार में अवैध रूप से निवास कर रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या की डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस संबंध में गृह विभाग के अपर सचिव मो. शादाब मुस्ताक ने सभी जिलों के डीएम, एसएसपी और एसपी को निर्देशित किया है।

पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का उल्लेख करते हुए, उन सभी बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की पहचान करने का आदेश दिया गया है जो अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। पहचान के बाद, इन्हें बांग्लादेश और म्यांमार के सीमा सुरक्षा बल को सौंपा जाएगा।

कहा जा रहा है कि पिछले महीने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमाई जिलों की जनसंख्या में बदलाव की समीक्षा की थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।

डिपोर्टेशन के साथ बायोमीट्रिक पहचान भी ली जाएगी। बिहार के सीमाई जिलों जैसे किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में सबसे अधिक जनसंख्या परिवर्तन देखा गया है, जो अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या के कारण हुआ है।

पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है, और बिहार में 25 से 30 लाख ऐसे लोगों के रहने का अनुमान है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पिछले साल के आदेश के बाद भी इस दिशा में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन गृह मंत्री की समीक्षा बैठक के बाद अब सक्रियता बढ़ी है।

जारी आदेश के अनुसार, डिपोर्ट किए जाने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की बायोमीट्रिक पहचान भी ली जाएगी, और यह रिकॉर्ड गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

इससे डिपोर्ट किए गए लोगों की पुनर्वापसी में कठिनाई होगी। जिलों में विशेष टास्क फोर्स का गठन कर यह कार्य किया जाएगा, और इसकी मासिक रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी।