भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को फिर से किया स्पष्ट
भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का पुनरुत्थान
भारत ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के प्रति अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दोहराते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के पहले सचिव रघु पुरी ने कहा कि आतंकवाद किसी भी सीमा या राष्ट्रीयता को नहीं मानता और यह अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए एक "अस्तित्वगत खतरा" बन चुका है।
आतंकवाद का खतरा और पहलगाम हमला
भारत ने यूएनओसीटी के वार्षिक संबोधन में अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख किया। यह हमला 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) द्वारा किया गया था, जो लश्कर-ए-तैयबा का एक हिस्सा है। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान गई थी। भारत ने इस घटना के माध्यम से दिखाया कि कैसे आतंकवादी संगठन निर्दोष लोगों को निशाना बना रहे हैं।
आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता
पुरी ने कहा, "हमें आईएसआईएस और अल कायदा तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करनी होगी।" भारत ने वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति (जीसीटीएस) के महत्व पर जोर दिया और कहा कि वह इसकी 9वीं समीक्षा में सक्रिय रूप से भाग लेगा।
दिल्ली घोषणा का महत्व
आतंकवाद फैलाने के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने के लिए 'दिल्ली घोषणा' एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अक्टूबर 2022 में भारत की अध्यक्षता में सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-विरोधी समिति ने इस विषय पर विशेष बैठक का आयोजन किया था।
