भारत ने अमेरिकी विधेयक पर नजर रखी, रूसी तेल खरीद पर उठे सवाल

भारत ने हाल ही में अमेरिका के प्रस्तावित विधेयक पर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है, जिसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद पर शुल्क लगाने का प्रावधान है। विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है, साथ ही अमेरिकी वीजा नीतियों में बदलाव को लेकर भी चिंता जताई है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है और इसका भारतीय नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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भारत की प्रतिक्रिया अमेरिकी विधेयक पर

भारत ने शुक्रवार को बताया कि वह अमेरिका के उस प्रस्तावित विधेयक पर ध्यान दे रहा है, जिसमें भारत, चीन और अन्य देशों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान है। यह विधेयक डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 60 अमेरिकी सीनेटर इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं।


विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहा है और उन्हें इस विधेयक की पूरी जानकारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न देशों से तेल खरीदता है।


वीजा नीतियों में बदलाव पर भारत की चिंता

भारत ने अमेरिकी वीजा नीतियों में हाल ही में हुए बदलावों पर भी अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है। अमेरिका ने विदेशी छात्रों, विनिमय कार्यक्रमों में भाग लेने वालों और पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को कड़ा कर दिया है। इसके तहत एक पुरानी नीति को समाप्त कर दिया गया है, जिसके तहत ये लोग बिना सरकारी निगरानी के अनिश्चित काल तक अमेरिका में रह सकते थे। इस बदलाव से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों पर प्रभाव पड़ने की आशंका है।


भारत सरकार की स्थिति

वीजा नियमों में बदलाव पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इन नियमों से संबंधित खबरें देखी हैं। उन्होंने बताया कि वीजा जारी करने की प्रक्रिया और आव्रजन से जुड़े मुद्दे किसी भी देश के संप्रभु अधिकार के अंतर्गत आते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जब भी भारतीय यात्रियों या छात्रों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो भारत सरकार इसे अमेरिकी पक्ष के समक्ष उठाती है ताकि इन मुद्दों का समाधान किया जा सके।