भारत-चीन संबंधों में शक्सगाम घाटी का विवाद: नई चुनौतियाँ

भारत और चीन के बीच शक्सगाम घाटी को लेकर तनाव बढ़ गया है। चीन ने इस क्षेत्र पर अपने दावे को दोहराते हुए निर्माण कार्यों को वैध बताया है, जबकि भारत ने इसे अस्वीकार्य कहा है। यह विवाद न केवल क्षेत्रीय अखंडता के लिए चुनौती है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। जानें इस विवाद के पीछे की रणनीति और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।
 | 
भारत-चीन संबंधों में शक्सगाम घाटी का विवाद: नई चुनौतियाँ

भारत-चीन संबंधों में बढ़ता तनाव

भारत और चीन के बीच संबंधों में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है, जिसका मुख्य कारण शक्सगाम घाटी है। चीन ने इस विवादित क्षेत्र पर अपने दावे को दोहराते हुए वहां चल रहे निर्माण कार्यों को सही ठहराया है, जबकि भारत की आपत्तियों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह स्थिति भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए एक सीधी चुनौती है। चीन का यह रुख एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह सीमा विवादों को वास्तविकता में बदलने का प्रयास कर रहा है।


चीन का दावा और भारत की प्रतिक्रिया

चीन का कहना है कि शक्सगाम घाटी उसका हिस्सा है और वहां का विकास कार्य पूरी तरह से वैध है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने भारत की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि यह क्षेत्र चीन और पाकिस्तान के बीच हुए सीमा समझौते के अंतर्गत आता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विकास कार्य स्थानीय लोगों के हित में है। भारत ने इस दावे को अस्वीकार्य बताते हुए कहा है कि शक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है और किसी भी चीनी दावे को मान्यता नहीं दी जा सकती।


शक्सगाम घाटी का महत्व

शक्सगाम घाटी काराकोरम पर्वत श्रृंखला के उत्तर में स्थित एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का हिस्सा माना जाता है। भारत ने इस क्षेत्र पर हमेशा अपना दावा किया है। 1963 में पाकिस्तान ने इस घाटी का एक बड़ा हिस्सा चीन को सौंप दिया था, जिसे भारत ने कभी मान्यता नहीं दी। इस क्षेत्र का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सियाचिन ग्लेशियर के निकट है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है।


भविष्य की चुनौतियाँ

चीन की सक्रियता का सीधा असर भारत की उत्तरी सीमाओं पर पड़ता है। यदि चीन और पाकिस्तान इस क्षेत्र में संयुक्त सैन्य तालमेल बढ़ाते हैं, तो भारत को दो मोर्चों पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। यह केवल एक सैन्य चुनौती नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक संकट भी है। शक्सगाम घाटी का मुद्दा भारत के लिए एक चेतावनी है, जो यह दर्शाता है कि चीन केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जमीन पर स्थिति को बदलने में विश्वास करता है।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

कांग्रेस पार्टी ने चीनी प्रवक्ता के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि उनकी विदेश नीति कमजोर हो गई है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर कहा कि चीन ने जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को अपना बताया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि मोदी जी 'लाल आंख' का क्या हुआ?