भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति: ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के निर्णय के पीछे के कारणों को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है। ट्रंप ने कहा कि सुरक्षा तनाव के कारण आपूर्ति में रुकावटें आ रही हैं, और उन्होंने आश्वासन दिया कि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल का भंडार है। इस निर्णय को एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा।
| Mar 8, 2026, 12:00 IST
भारत के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को स्पष्ट किया कि भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव को कम करना है। ट्रंप के अनुसार, पश्चिम एशिया और गल्फ क्षेत्र में आपूर्ति मार्गों में तनाव के कारण रुकावटें उत्पन्न हो रही हैं, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। एयर फोर्स वन में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए ट्रंप ने स्कॉट बेसेंट की उस घोषणा का समर्थन किया, जिसमें भारतीय रिफाइनर्स को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल के शिपमेंट खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी गई है।
मार्केट को स्थिर रखने की कोशिश
होर्मुज स्ट्रेट के पास सुरक्षा तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावट की आशंका बढ़ गई है। इस पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने कहा कि यदि बाजार को स्थिर करने के लिए और कदम उठाने की आवश्यकता पड़ी, तो वे ऐसा करने में संकोच नहीं करेंगे। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि दुनिया भर में और विशेष रूप से अमेरिका के पास पर्याप्त तेल का भंडार है और स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी। यूएस ट्रेजरी विभाग की इस छूट से भारत उन रूसी तेल शिपमेंट को आयात कर सकेगा, जो नए अमेरिकी प्रतिबंध के कारण बीच में फंस गए थे।
वॉशिंगटन-नई दिल्ली की रणनीतिक साझेदारी
अमेरिकी अधिकारियों, स्कॉट बेसेंट और क्रिस राइट ने इस बात पर जोर दिया कि यह एक अस्थायी उपाय है और इसका मतलब रूस के प्रति उनकी नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं है। बेसेंट ने बताया कि पहले भारत को रूसी तेल न खरीदने के लिए कहा गया था और भारत ने इसका पालन भी किया, लेकिन वर्तमान सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए यह छूट दी गई है।
उन्होंने भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि यह कदम ईरान की उस कोशिश का मुकाबला करने के लिए है, जिसमें वह वैश्विक ऊर्जा को ‘बंधक’ बनाने का प्रयास कर रहा है। वहीं, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि देश कच्चे तेल की खरीद के लिए किसी बाहरी मंजूरी पर निर्भर नहीं है।
