भारत के संविधान का सिंधी संस्करण जारी, उपराष्ट्रपति ने की सराहना

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में सिंधी भाषा में भारत के संविधान का नवीनतम संस्करण जारी किया। उन्होंने बताया कि यह कदम नागरिकों को उनके अधिकारों को समझने में मदद करेगा। इस अवसर पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी भाषाई विविधता और एकता के महत्व पर जोर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण घोषणा के बारे में और अधिक जानकारी।
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भारत के संविधान का सिंधी संस्करण जारी, उपराष्ट्रपति ने की सराहना gyanhigyan

सिंधी भाषा में संविधान का नया संस्करण

नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज सिंधी भाषा में भारत के संविधान का नवीनतम संस्करण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि सिंधी एक प्राचीन और मधुर भाषा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार देवनागरी लिपि में सिंधी में संविधान का संस्करण जारी किया गया है। उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराने के लिए विशेष ध्यान दिया है। 


 


राधाकृष्णन ने यह भी बताया कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि हर नागरिक, चाहे वह किसी भी भाषा का हो, देश के मूल्यों को समझ सके और उनसे जुड़ सके। उन्होंने कहा कि जब लोग संविधान को अपनी भाषा में पढ़ सकेंगे, तो शासन और जनता के बीच की दूरी कम होगी। इस अवसर पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह आयोजन केवल भाषाई धरोहर का उत्सव नहीं है, बल्कि यह देश की एकता और सांस्कृतिक विविधता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है। 


 


मेघवाल ने आगे कहा कि जब संविधान सभी भाषाओं में उपलब्ध होगा, तो आम लोग इसे पढ़कर अपने अधिकारों को समझ सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि संसद इस माह की 16, 17 और 18 तारीख को बुलाई गई है, और उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।