भारत के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक प्रणाली में तकनीकी प्रगति का आह्वान किया
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रणाली में तकनीकी प्रगति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय वितरण में तेजी लाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग अनिवार्य है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में, उन्होंने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया और न्यायपालिका में तकनीकी नवाचारों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने मामलों के शीघ्र निपटान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया है।
| May 16, 2026, 16:34 IST
न्याय वितरण में तकनीकी प्रगति का महत्व
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को न्यायिक प्रणाली को प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय वितरण में तेजी लाने के लिए तकनीकी प्रगति का उपयोग करना आवश्यक है। न्यायपालिका की कार्यक्षमता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी को एक प्रभावी उपाय मानते हुए, उन्होंने यह भी बताया कि देश की न्यायपालिका आम जनता के हित में तकनीकी नवाचारों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्य न्यायाधीश मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे, जिसका विषय 'विखंडन से एकीकरण' था, जिसमें एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से न्याय को सशक्त बनाने पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्घाटन भी किया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका तकनीकी प्रगति के उपयोग में 1990 से सक्रिय रही है और अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नवीनतम डिजाइनों को आम जनता के लाभ के लिए लागू करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने न्यायपालिका में तकनीकी प्रगति को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि न्याय वितरण प्रणाली को तेज किया जा सके। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा विकसित इन प्लेटफार्मों की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन तकनीकी नवाचारों को अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने की आवश्यकता की बात कही है।
न्यायिक प्रणाली में सुधार के लिए समिति का गठन
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक प्रणाली में मामलों के शीघ्र निपटान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। इस अवसर पर मंत्री मेघवाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सभरवाल ने भी अपने विचार साझा किए।
