भारत के प्रधान न्यायाधीश ने युवा वकीलों को तकनीकी ज्ञान के महत्व पर जोर दिया

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने युवा वकीलों को तकनीकी ज्ञान के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अपराध की बदलती प्रकृति और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए वकीलों को निरंतर अद्यतन रहना चाहिए। न्यायमूर्ति ने हिसार में आयोजित एक समारोह में वकीलों को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीकी संसाधनों का उपयोग उनकी दक्षता को बढ़ाएगा और न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाएगा। जानें उनके विचार और सुझाव।
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भारत के प्रधान न्यायाधीश ने युवा वकीलों को तकनीकी ज्ञान के महत्व पर जोर दिया

युवाओं को तकनीकी ज्ञान से लैस करने की आवश्यकता

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि अपराध की बदलती प्रवृत्तियों और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए वकीलों, विशेषकर युवा अधिवक्ताओं को निरंतर अद्यतन रहना आवश्यक है।


उन्होंने यह भी बताया कि यदि वकील ई-पुस्तकालय, डिजिटल संसाधनों और आधुनिक तकनीकों से लैस होते हैं, तो इससे उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और न्याय प्रणाली भी अधिक प्रभावी बनेगी।


यह बयान उन्होंने हिसार बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में न्यायिक अधिकारियों और वकीलों को संबोधित करते हुए दिया।


न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने हिसार जिले के पेतवाड़ गांव में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी और यहीं पर वकालत भी की थी। उन्होंने कहा, 'हालांकि मेरा समय हिसार में बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन मेरे और यहां के लोगों के बीच का संबंध अनंत है। हिसार बार से मुझे जो प्रेम और मार्गदर्शन मिला, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।'


उन्होंने आगे कहा, 'आजकल अपराधों की दर और उनकी प्रकृति तेजी से बदल रही है। साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी और तकनीकी आधारित अपराधों में वृद्धि हो रही है। ऐसे मामलों में प्रभावी बहस करने के लिए वकीलों को तकनीकी ज्ञान और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करनी होगी।'