भारत के परमाणु कार्यक्रम में नया मील का पत्थर: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सफलता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सफलता की घोषणा की, जो देश के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है, जो इसे स्व-संचालित विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया में सक्षम बनाता है। जानें भारत के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम के बारे में और थोरियम के उपयोग की संभावनाओं के बारे में।
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प्रधानमंत्री मोदी का ट्वीट और भारत का परमाणु सफर

6 अप्रैल को रात 9:41 बजे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने भारत के असैन्य परमाणु कार्यक्रम की प्रगति के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'भारत के लिए गर्व का पल। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई।' इससे पहले, उन्होंने बताया कि भारत ने अपने तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में कदम रखा है। चर्चा है कि तमिलनाडु के कलपक्कम में निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। इस तकनीक के कई महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिनका अर्थ समझना आवश्यक है।


भारत का परमाणु कार्यक्रम: तीन चरणों की योजना

भारत ने 1954 में अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की थी, जब देश स्वतंत्र हुआ। यूरेनियम के सीमित भंडार के कारण, थोरियम का उपयोग करने की योजना बनाई गई। यह योजना होमी जहांगीर भाभा द्वारा बनाई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, भारत के पास दुनिया के यूरेनियम भंडार का केवल 2 प्रतिशत है, जबकि थोरियम का 25 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है।


थोरियम की विशेषताएँ और इसके उपयोग

भारत में लगभग 4 लाख टन थोरियम का भंडार है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो विखंडनीय नहीं होता, यानी न्यूट्रॉन के टकराने से इसका विखंडन नहीं होता। इसके बजाय, यह यूरेनियम-233 में परिवर्तित हो जाता है, जिससे ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।


परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीन चरण

स्टेज 1: प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग होता है।


स्टेज 2: बाई-प्रोडक्ट प्लूटोनियम (Pu)-239 का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विकसित करने की आवश्यकता होती है।


स्टेज 3: थोरियम-आधारित न्यूक्लियर रिएक्टर की आवश्यकता होती है।


भारत में न्यूक्लियर रिएक्टरों का स्थान

1. राजस्थान- रावतभाटा


2. तमिलनाडु- कुडनकुलम, कलपक्कम


3. गुजरात- काकरापार


4. यूपी- नरौरा


5. कर्नाटक- कैगा


6. महाराष्ट्र- तारापुर


फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की विशेषताएँ

प्रधानमंत्री ने बताया कि यह उन्नत रिएक्टर अपनी खपत से अधिक ईंधन उत्पन्न करने में सक्षम है। 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक (MWe) का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित है। इसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड संचालित करता है।


क्रिटिकैलिटी का अर्थ

क्रिटिकैलिटी उस स्थिति को दर्शाता है जब कोई परमाणु रिएक्टर एक स्थिर, स्व-संचालित विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया प्राप्त कर लेता है। इसका मतलब है कि रिएक्टर को बाहरी न्यूट्रॉन स्रोत की आवश्यकता नहीं होती।


फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का भविष्य

फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों को अधिक विखंडनीय सामग्री उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग किया जाता है।