भारत के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की कमी से बढ़ी चिंता

भारत के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले के भंडार में कमी से चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, 50 संयंत्रों में कोयले का स्टॉक केवल 9 दिनों की आवश्यकता के बराबर है। मानसून के कारण खनन और परिवहन में बाधा आ रही है, जिससे बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, सरकार ने स्थिति पर नजर रखी है और सप्लाई सुधारने के लिए कदम उठा रही है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और संभावित समाधान।
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कोयले के स्टॉक में कमी की गंभीरता


भारत के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले के भंडार को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर 2026 तक देश के 50 थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक गंभीर रूप से घट गया है। इन संयंत्रों में कुल मिलाकर लगभग 28.2 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जो आवश्यक मात्रा का लगभग 48 प्रतिशत है।


9 दिनों का स्टॉक चिंता का विषय

CEA के आंकड़ों के अनुसार, इन 50 संयंत्रों में उपलब्ध कोयला केवल 9 दिनों की आवश्यकता के बराबर है, जबकि सामान्य स्थिति में 19 दिनों का स्टॉक होना चाहिए। इसका मतलब है कि मौजूदा भंडार सामान्य आवश्यकताओं की तुलना में काफी कम है।


इन संयंत्रों की कुल बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 224 गीगावाट है। यदि कोयले की आपूर्ति में रुकावट जारी रहती है, तो यह बिजली उत्पादन पर दबाव डाल सकता है।


मानसून से आपूर्ति में बाधा

कोयले के स्टॉक में कमी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें मानसून के दौरान भारी बारिश से खनन और परिवहन प्रभावित होना शामिल है। बारिश के कारण खदानों से कोयला निकालना और उसे बिजली संयंत्रों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।


इसका प्रभाव तब अधिक महसूस हो रहा है जब बिजली की मांग उच्च स्तर पर बनी हुई है।


बिजली की मांग में वृद्धि

देश में बिजली की मांग बढ़ने के साथ-साथ थर्मल पावर प्लांट्स पर निर्भरता भी बनी हुई है। संयंत्रों को लगातार ईंधन की आवश्यकता होती है। यदि कोयले की आपूर्ति और बिजली की मांग के बीच संतुलन बिगड़ता है, तो यह स्टॉक पर दबाव डाल सकता है।


हालांकि, मौजूदा आंकड़े देश में तत्काल बिजली संकट की पुष्टि नहीं करते, लेकिन कम कोयला भंडार को सप्लाई व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है।


सरकार की निगरानी और प्रयास

सरकार कोयले के कम स्टॉक वाले संयंत्रों की स्थिति पर नजर रख रही है। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, गंभीर श्रेणी वाले प्लांट्स की दैनिक आधार पर निगरानी की जा रही है और उन्हें नियमित ईंधन आपूर्ति उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।


सरकार ने कोयला आपूर्ति बढ़ाने के लिए कुछ कैप्टिव खदानों से सप्लाई बढ़ाने और Coal India की सहायक कंपनियों की लोडिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है।


Coal India की सप्लाई में वृद्धि

दिलचस्प बात यह है कि कोयले की कुल सप्लाई में वृद्धि भी देखी गई है। Coal India के अनुसार, अगस्त 2026 में उसकी कुल कोयला सप्लाई सालाना आधार पर 5.5 प्रतिशत बढ़कर 60.60 मिलियन टन हो गई।


बिजली क्षेत्र को सप्लाई भी लगभग 4.5 प्रतिशत बढ़कर 48.46 मिलियन टन रही।


कंपनी के पास खदानों में लगभग 76 मिलियन टन का कोयला भंडार है, जो यह दर्शाता है कि समस्या केवल उत्पादन की कमी से संबंधित नहीं है, बल्कि खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने की लॉजिस्टिक्स और मौसमी परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हैं।


क्या बिजली संकट का खतरा है?

हालांकि कम स्टॉक के कारण चिंता बढ़ी है, लेकिन इसे सीधे तौर पर देशव्यापी बिजली संकट कहना सही नहीं होगा। सरकार का कहना है कि गंभीर स्टॉक वाले प्लांट्स की निगरानी की जा रही है और सप्लाई सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।


आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति, कोयले की आवाजाही, बिजली की मांग और प्लांट्स में स्टॉक की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि कोयले की आपूर्ति में सुधार होता है, तो थर्मल प्लांट्स के भंडार को फिर से बढ़ाया जा सकता है।


फिलहाल, 50 पावर प्लांट्स में कम स्टॉक ने ऊर्जा क्षेत्र के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। सरकार और कोयला कंपनियों की प्राथमिकता अब यह सुनिश्चित करना है कि बिजली संयंत्रों तक ईंधन की सप्लाई लगातार बनी रहे।