भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति: BSNL का निजीकरण नहीं होगा

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने BSNL के निजीकरण की संभावना को खारिज किया और बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। 5G सेवाओं का विस्तार और सीमावर्ती गांवों में कनेक्टिविटी में सुधार के बारे में भी जानकारी दी गई। BSNL ने लाभ अर्जित किया है और स्वदेशी 4G तकनीक के विकास की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
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भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति: BSNL का निजीकरण नहीं होगा

संसद में टेलीकॉम क्षेत्र की उपलब्धियों पर चर्चा

संसद भवन, नई दिल्ली। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज, बुधवार को संसद में देश के टेलीकॉम क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दूरसंचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है। बीएसएनएल के निजीकरण के बारे में पूछे जाने पर, मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका कोई प्रश्न नहीं है और यह संस्था हमेशा जनता की सेवा में तत्पर रहेगी। उन्होंने बताया कि जहां पहले डेटा की औसत कीमत 290 रुपये थी, वह अब घटकर केवल 8 रुपये रह गई है, जो लगभग 97% की कमी को दर्शाता है। वर्तमान में 5G नेटवर्क देश के 99.9% जिलों में उपलब्ध है और 120 करोड़ उपभोक्ताओं में से 40 करोड़ लोग 5G सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। यह दुनिया में सबसे तेज 5G विस्तारों में से एक है, जिसने भारत को डिजिटल क्रांति के अग्रणी देशों में खड़ा किया है। 


बीएसएनएल की आत्मनिर्भरता और लाभ

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि BSNL के निजीकरण का कोई मुद्दा नहीं है और यह पूरी तरह से जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि 18 वर्षों के बाद पहली बार BSNL ने 2024-25 में लगातार दो तिमाहियों में 280 करोड़ और 262 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। इसके अलावा, BSNL के उपभोक्ताओं की संख्या जून 2024 में 8.5 करोड़ से बढ़कर 9.27 करोड़ हो गई है। राजस्थान में BTS अपटाइम भी 92% से बढ़कर 97% हो गया है, जो सेवा की गुणवत्ता में सुधार का संकेत है।


सीमावर्ती गांवों में कनेक्टिविटी में सुधार

सिंधिया ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में केवल 42% सीमावर्ती गांवों में टेलीकॉम सेवाएं उपलब्ध थीं, जो अब बढ़कर 98% हो गई हैं। 17,600 में से 17,222 गांवों को कनेक्टिविटी से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीमावर्ती इलाकों में पुराने नियमों में व्यापक बदलाव किए हैं, जिनमें सिग्नल फेड-आउट क्लॉज को समाप्त करना, डिस्टेंस प्रतिबंधों में ढील और राइट ऑफ वे नियमों को सरल बनाना शामिल है। राजस्थान में भी 1,322 सीमावर्ती गांवों में से 1,285 गांवों को कनेक्टिविटी मिल चुकी है, जबकि शेष गांवों को 4G सैचुरेशन योजना के तहत कवर किया जा रहा है।


वाइब्रेंट विलेज योजना और स्वदेशी 4G स्टैक

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत सीमावर्ती गांवों को देश के “पहले गांव” के रूप में विकसित किया जा रहा है। उत्तराखंड में 705 में से 684 गांवों को टेलीकॉम कनेक्टिविटी मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पहली बार स्वदेशी 4G टेलीकॉम स्टैक विकसित कर वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी क्षमता साबित की है। BSNL के माध्यम से 1 लाख स्वदेशी 4G टावर स्थापित किए जा चुके हैं और आगे 22,000 टावर और लगाए जाएंगे।


भारत की नई तकनीकी दिशा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल टेलीकॉम सेवाओं का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उपकरण निर्माण में भी अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही 5G सेवाएं भी स्वदेशी तकनीक के माध्यम से और अधिक मजबूत रूप में देशभर में उपलब्ध होंगी।