भारत के चीनी उद्योग में वृद्धि: किसानों और उपभोक्ताओं के लिए अच्छे संकेत

भारत का चीनी उद्योग इस वर्ष मजबूत स्थिति में है, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की संभावना है। गन्ने की पेराई में तेजी आई है, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025-26 के लिए सकारात्मक अनुमान हैं, और किसानों को समय पर भुगतान मिलने की उम्मीद है। जानें कैसे केंद्र सरकार की नीतियों ने इस क्षेत्र को मजबूत किया है और किसानों के लिए बेहतर अवसर प्रदान किए हैं।
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भारत के चीनी उद्योग में वृद्धि: किसानों और उपभोक्ताओं के लिए अच्छे संकेत

चीनी उत्पादन में वृद्धि का संकेत

भारत के चीनी उद्योग में वृद्धि: किसानों और उपभोक्ताओं के लिए अच्छे संकेत


नई दिल्ली। इस वर्ष भारत का चीनी उद्योग एक मजबूत स्थिति में है, जिससे किसानों और आम उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की संभावना है। वर्तमान पेराई सत्र में गन्ने की पेराई में तेजी आई है, जिससे चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश की 499 चीनी मिलों ने लगभग 1340 लाख टन गन्ने की पेराई की है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 237 लाख टन अधिक है। अधिक पेराई का अर्थ है अधिक चीनी उत्पादन। इस दौरान 118 लाख टन नई चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 23 लाख टन अधिक है। इसके साथ ही, चीनी निकालने की क्षमता, जिसे रिकवरी रेट कहा जाता है, में भी सुधार देखा गया है।


इस वर्ष औसत रिकवरी रेट 8.83 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.16 प्रतिशत अधिक है। यह भले ही एक छोटा आंकड़ा हो, लेकिन इसका मतलब लाखों टन अतिरिक्त चीनी उत्पादन से है। इसका लाभ यह है कि अब गन्ने से अधिक चीनी का उत्पादन हो रहा है, जिससे मिलों की आय में वृद्धि हो रही है और किसानों को समय पर भुगतान मिल सकेगा।


बेहतर गन्ने की किस्में, अनुकूल मौसम और मिलों की तकनीकी क्षमता में सुधार इसके पीछे के मुख्य कारण माने जा रहे हैं। 2025-26 के पेराई सत्र के लिए तस्वीर और भी सकारात्मक बताई जा रही है। एथेनाल उत्पादन के लिए लगभग 35 लाख टन चीनी को अलग करने के बाद भी, देश में 315 लाख टन शुद्ध चीनी उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 53.20 लाख टन अधिक है। इसका मतलब है कि बाजार में चीनी की कमी की संभावना नहीं है, जिससे उपभोक्ताओं को कीमतों में अचानक वृद्धि का डर कम रहेगा।


गन्ना उत्पादन के मोर्चे पर भी किसानों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ वर्षों में गन्ने का कुल उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2025-26 के प्रारंभिक अनुमान बताते हैं कि उत्पादन 4756 लाख टन से अधिक हो सकता है। अधिक उत्पादन का मतलब है कि किसानों की फसल बिकने की बेहतर संभावना है। किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा गन्ने के भुगतान का होता है, और चीनी उद्योग की मजबूती का सीधा असर इसी पर पड़ता है। केंद्र सरकार की नीतियों जैसे समय पर एफआरपी (उचित और लाभकारी मूल्य) तय करना, अतिरिक्त चीनी को एथेनाल में बदलने की अनुमति और निर्यात से जुड़े निर्णयों ने मिलों की आर्थिक स्थिति को बेहतर किया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि कई राज्यों में किसानों को पहले की तुलना में जल्दी भुगतान मिल रहा है। एफआरपी में लगातार वृद्धि ने भी किसानों को विश्वास दिलाया है। कुछ साल पहले गन्ने का एफआरपी 285 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 355 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। उत्पादन में वृद्धि और बेहतर दाम मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।