भारत के उदय का समय: आरएसएस प्रमुख और उद्योगपति ने साझा किए विचार

नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन समारोह में मोहन भागवत और कुमार मंगलम बिड़ला ने भारत के विकास और वैश्विक चुनौतियों पर विचार साझा किए। भागवत ने कहा कि भारत का समय आ गया है, लेकिन इसके लिए हमें अपनी तैयारियों को मजबूत करना होगा। बिड़ला ने संघ की प्रशंसा करते हुए कहा कि संघ ने समाज और राष्ट्र के साथ खड़े रहकर सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस कार्यक्रम ने आत्मविश्वास से भरे नए भारत की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक बनकर सामने आया।
 | 
भारत के उदय का समय: आरएसएस प्रमुख और उद्योगपति ने साझा किए विचार gyanhigyan

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समापन समारोह

नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन समारोह में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रमुख उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने भारत के वर्तमान परिदृश्य, वैश्विक चुनौतियों और राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। दोनों वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज का समय भारत के विकास का है, लेकिन इसके लिए देश को अपनी तैयारी, सामर्थ्य और सामाजिक एकता को और मजबूत करना होगा।


मोहन भागवत का संदेश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत संकटों से जूझ रही दुनिया को समग्र समाधान प्रदान कर सकता है, लेकिन 'विश्वगुरु' बनने के लिए हमें अपनी तैयारियों को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा, "भारत का समय आ गया है।" भागवत ने यह भी कहा कि दुनिया ताकतवर की बात सुनती है, और हमें अपने देश को ‘अत्यंत समृद्ध’ बनाने की आवश्यकता है।


कुमार मंगलम बिड़ला की प्रशंसा

कुमार मंगलम बिड़ला ने संघ की खुले मन से प्रशंसा करते हुए कहा कि संघ ने पिछले सौ वर्षों में हर चुनौती के समय समाज और राष्ट्र के साथ खड़े रहकर सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने संघ की राष्ट्रनिष्ठा, अनुशासन और चरित्र निर्माण की सतत साधना की सराहना की।


वैश्विक संकट और भारत की भूमिका

बिड़ला ने कहा कि वर्तमान समय अनेक वैश्विक संकटों से भरा हुआ है, जिसमें पश्चिम एशिया में संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई क्रांति विश्व अर्थव्यवस्था को तेजी से बदलने जा रही है।


भारत का भविष्य

उन्होंने विश्वास जताया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद यह भारत का समय है। यदि देश ने अपनी राष्ट्रीय क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत किया, तो वह विश्व में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।


गुलामी के अनुभव और वर्तमान चुनौतियाँ

मोहन भागवत ने कहा कि भारत ने हजार वर्षों की गुलामी झेली है, और अब हमें अपनी शक्तियों को पुनः जागृत करने की आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ शक्तियां भारत को मजबूत होते नहीं देखना चाहतीं और समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास करती रहती हैं।


संघ का निरंतर प्रयास

भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में एकता, सेवा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का सतत कार्य कर रहा है। नागपुर का यह कार्यक्रम आत्मविश्वास से भरे नए भारत की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक है।