भारत की स्वदेशी एयरबोर्न प्रणाली 'नेत्र' को मिली अंतिम मंजूरी

भारत ने अपनी स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली 'नेत्र' को अंतिम परिचालन मंजूरी दे दी है। यह प्रणाली दुश्मन की गतिविधियों को सीमा पार से पहचानने की क्षमता प्रदान करती है। बेंगलुरु में आयोजित समारोह में इसे औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। नेत्र प्रणाली की विशेषताएँ इसे युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण बनाती हैं, और यह भारत की सामरिक शक्ति को मजबूत करने में सहायक होगी। रक्षा मंत्री ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है, जो देश की सुरक्षा में एक नया अध्याय जोड़ती है।
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नेत्र प्रणाली की औपचारिक स्वीकृति

भारत ने अपनी स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली 'नेत्र' को अंतिम परिचालन मंजूरी प्रदान कर दी है, जिससे इसे भारतीय वायुसेना में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह प्रणाली दुश्मन की गतिविधियों को सीमा पार से ही पहचानने की क्षमता प्रदान करेगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित यह तकनीक भारतीय वायुसेना को एक नई निगरानी क्षमता प्रदान करेगी, जिससे दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइलों पर नजर रखना संभव होगा। नेत्र प्रणाली को अंतिम मंजूरी मिलना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दर्शाता है कि भारत अब अपनी सुरक्षा के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं है।


उपलब्धि का महत्व

बेंगलुरु में आयोजित एक समारोह में भारतीय वायुसेना को नेत्र प्रणाली का अंतिम संचालन प्रमाणपत्र सौंपा गया। यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि भारत अब अत्याधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करने में सक्षम हो चुका है। 2017 में प्रारंभिक संचालन मंजूरी मिलने के बाद, इस प्रणाली ने कई परीक्षणों में अपनी क्षमता साबित की है। अब यह प्रणाली भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण ताकत बनने जा रही है।


नेत्र प्रणाली की विशेषताएँ

नेत्र प्रणाली एक उड़ती हुई आंख और दिमाग के रूप में कार्य करती है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के विमानों, ड्रोन और समुद्री गतिविधियों की पहचान कर सकती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मित्र और शत्रु की सटीक पहचान कर सकती है और युद्ध के दौरान अपने लड़ाकू विमानों को वास्तविक समय में दिशा निर्देश देती है। यह प्रणाली 300 से 360 डिग्री तक निगरानी करने की क्षमता रखती है।


तकनीकी विशेषताएँ और रणनीतिक महत्व

ब्राजील के एम्ब्रेयर विमान मंच पर आधारित इस प्रणाली में अत्याधुनिक सक्रिय इलेक्ट्रोनिक स्कैन रडार लगाया गया है। यह वही प्रणाली है जिसने बालाकोट हमले के दौरान भारतीय वायुसेना को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई थी। अब इसे पूरी युद्धक मंजूरी मिलना पाकिस्तान और चीन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। उप वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने इसे आत्मनिर्भर भारत की सैन्य क्रांति का उत्सव बताया।


रक्षा मंत्री का बयान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत की सामरिक शक्ति में एक ऐतिहासिक छलांग बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली भारत की हवाई निगरानी और कमान नियंत्रण क्षमता को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी। नेत्र केवल एक रडार प्रणाली नहीं है, बल्कि यह युद्ध संचालन का केंद्रीय तंत्र है।


भविष्य की संभावनाएँ

आज के बदलते भू-राजनीतिक माहौल में नेत्र प्रणाली की अहमियत और बढ़ जाती है। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच, यह प्रणाली भारत को पहले वार की चेतावनी देने और त्वरित जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता प्रदान करती है। इसके अलावा, स्वदेशी होने के कारण भारत इसे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित कर सकता है।


उद्योग को बढ़ावा

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत पहले से रूसी इल्युषिन आधारित फाल्कन चेतावनी प्रणाली का संचालन करता है। नेत्र के आने से भारत को एक स्वदेशी विकल्प मिला है, जो भविष्य में पूरी तरह भारतीय सैन्य नेटवर्क के अनुरूप विकसित किया जा सकेगा। इससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र में देशी उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।


परियोजना की चुनौतियाँ

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की वैमानिकी शाखा की महानिदेशक डॉक्टर के. राजलक्ष्मी मेनन ने इस परियोजना के दौरान आई तकनीकी चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सटीक प्रणाली अभियांत्रिकी और उड़ान परीक्षणों की सूक्ष्म योजना ने इस परियोजना को सफलता तक पहुंचाया।


नया भारत

नेत्र की सफलता केवल एक सैन्य परियोजना की सफलता नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता की हार भी है जो मानती थी कि भारत केवल विदेशी हथियारों पर निर्भर रह सकता है। यह उपलब्धि दुश्मनों को स्पष्ट संदेश देती है कि नया भारत अब केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा, बल्कि हर चुनौती का सामना तकनीक, ताकत और रणनीतिक बढ़त से करेगा।