भारत की स्वतंत्रता पर कमल हासन का कड़ा बयान, अमेरिका की इजाजत पर उठे सवाल
कमल हासन ने हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति देने पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता और सॉवरेनिटी पर जोर देते हुए कहा कि हम किसी अन्य देश के आदेश पर नहीं चलते। इस मुद्दे पर भारतीय राजनीति में भी हलचल मची है, जहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और भारत का दृष्टिकोण।
| Mar 8, 2026, 12:05 IST
कमल हासन का बयान
हाल ही में एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी है, जिस पर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएँ आई हैं। अभिनेता और नेता कमल हासन ने सोशल मीडिया पर एक सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है और हम किसी अन्य देश के निर्देशों का पालन नहीं करते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्र देशों के बीच समानता का सम्मान ही शांति का मार्ग है।
कमल हासन का ट्वीट
To
— Kamal Haasan (@ikamalhaasan) March 7, 2026
The President of the United States of America @POTUS
Dear Mr. President,
We, the people of India, belong to a free and sovereign nation. We no longer take orders from distant foreign shores.
Please mind your own business to the best of your abilities.
Mutual respect…
अमेरिका की तेल नीति
अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक साक्षात्कार में कहा कि वैश्विक तेल की कमी को देखते हुए भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तेल की आपूर्ति को लेकर आश्वासन दिया कि उनके पास पर्याप्त संसाधन हैं और स्थिति जल्द ही सुधर जाएगी। हालांकि, भारतीय हलकों में इस अनुमति की भाषा को पसंद नहीं किया जा रहा है।
भारत का दृष्टिकोण
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि हमारी ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। अधिकारियों का कहना है कि भारत ने अपने तेल के स्रोतों को 40 देशों तक विस्तारित कर दिया है ताकि किसी एक मार्ग पर निर्भरता न रहे। भारत हमेशा वही तेल खरीदता है जो उसे सबसे सस्ता और उपयुक्त लगता है, और इसके लिए उसे किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर देश की राजनीति भी गर्म हो गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति हमारे इतिहास और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति समझौते की नीति का परिणाम है, जो देश के स्वाभिमान के लिए ठीक नहीं है।
