भारत की सुरक्षा को लेकर नौसेना प्रमुख का सशक्त बयान

भारत के नए नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने देश की सुरक्षा को लेकर एक स्पष्ट और सशक्त रुख अपनाया है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और सीमा पार दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने की बात की। स्वामीनाथन ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के महत्व पर भी जोर दिया, जो आतंकियों को निशाना बनाता है। इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक सुरक्षा परिवेश में हो रहे बदलावों और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। जानें इस महत्वपूर्ण बयान के सभी पहलुओं के बारे में।
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भारत की सुरक्षा को लेकर नौसेना प्रमुख का सशक्त बयान gyanhigyan

नौसेना प्रमुख का स्पष्ट संदेश

भारत के नए नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने सोमवार को देश की सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के प्रति एक मजबूत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी सीमा पार दुस्साहस का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और देश की अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। स्वामीनाथन, जो नौसेना की पश्चिमी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ हैं, ने कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है।


उन्होंने कहा कि देश में आतंकी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, विशेषकर जब ये विदेशी धरती से संचालित होती हैं.


ऑपरेशन सिंदूर का महत्व

स्वामीनाथन ने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' उन आतंकियों और उनके शिविरों को निशाना बनाता है जो 2025 में पहलगाम में हुई जघन्य घटना में शामिल थे। उन्होंने कहा, 'समझदार लोग जानते हैं कि दुस्साहस कभी भारत की तरफ से नहीं होता। भारत हमेशा जवाब देने के लिए तैयार रहता है।' उन्होंने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की उस टिप्पणी का भी जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि इस्लामाबाद के खिलाफ किसी भी दुस्साहस के गंभीर परिणाम होंगे।


स्वामीनाथन ने यह भी कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' इसलिए आवश्यक है ताकि भारत आतंकवाद का शिकार न बने और यह याद दिलाने के लिए कि देश को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाने होंगे।


वैश्विक सुरक्षा परिवेश में बदलाव

स्वामीनाथन ने वैश्विक सुरक्षा परिवेश में हो रहे बदलावों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं का तेजी से हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रणनीतिक तस्वीर को बदल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश रक्षा तैयारियों के लिए बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर हैं, वे आर्थिक और रणनीतिक अनिश्चितता का सामना कर सकते हैं।


उन्होंने भारतीय नौसेना की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल शांतिकाल की औपचारिक सेना नहीं है, बल्कि एक सक्रिय बल है जो जटिल समुद्री क्षेत्र में तैनात रहता है। आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि नौसेना को ऐसी प्रणालियों से लैस होना चाहिए जो भारत में ही डिजाइन और निर्मित हों।


वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नौ मई को भारत का अगला नौसेना प्रमुख नियुक्त किया गया है, और वह एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लेंगे, जो 31 मई को सेवानिवृत्त होंगे।