भारत की वैश्विक स्थिति: चुनौतियों के बीच मजबूती और आत्मनिर्भरता
भारत की बढ़ती ताकत और संतुलित नीतियाँ
हाल के वर्षों में, भारत ने वैश्विक संकटों के बीच अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखा है, जो देश की बढ़ती शक्ति और संतुलित नीतियों का संकेत है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस संदर्भ में कहा कि भारत ने न केवल खुद को संभाला है, बल्कि मजबूती के साथ आगे बढ़ा है।
छत्तीसगढ़ में दीक्षांत समारोह में संबोधन
आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि भारत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। उन्होंने यह भी बताया कि आज भारत दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
आत्मविश्वास और आशावाद की भावना
जयशंकर ने कहा कि पिछले दस वर्षों में देश की प्रगति ने समाज में एक नया आत्मविश्वास उत्पन्न किया है। यही कारण है कि भारत में आशावाद की भावना देखने को मिलती है, जबकि अन्य देशों में यह कमजोर होती जा रही है।
वैश्विक परिदृश्य में बदलाव
उन्होंने वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए बताया कि दुनिया इस समय बड़े संरचनात्मक बदलावों से गुजर रही है। देशों के बीच शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है, जिसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
प्रतिस्पर्धा और रणनीतियाँ
जयशंकर ने कहा कि तकनीक, ऊर्जा, सैन्य क्षमता, संपर्क और संसाधनों में हो रहे विकास ने प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है। देशों को जोखिम कम करने और संतुलन बनाने की रणनीतियाँ अपनानी होंगी।
भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिरता
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डाला है। इसके बावजूद, भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखा है।
आत्मनिर्भरता का महत्व
जयशंकर ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता देश को मजबूत बनाती है।
व्यावहारिक विदेश नीति
उन्होंने बताया कि भारत की विदेश नीति अब अधिक व्यावहारिक और लक्ष्य आधारित हो गई है, जिसका उद्देश्य भारतीय उत्पादकों के लिए बाजार का विस्तार करना है।
व्यापार और उद्यम का माहौल
जयशंकर ने कहा कि देश में व्यापार और उद्यम के लिए माहौल लगातार बेहतर हो रहा है, जिससे नए उद्यमियों को लाभ मिल रहा है।
आगामी चुनौतियाँ
उन्होंने कोरोना महामारी, युद्ध और जलवायु परिवर्तन को इस दशक की तीन बड़ी चुनौतियाँ बताया और कहा कि इनका असर हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ा है।
युवाओं की भूमिका
अपने संबोधन के अंत में, उन्होंने युवाओं को भविष्य के भारत का निर्माता बताया और कहा कि आने वाला समय अवसरों से भरा है।
भारत की विकास यात्रा
जयशंकर के बयान से स्पष्ट है कि भारत वैश्विक संकटों के बीच मजबूती से उभरकर सामने आया है और आने वाले समय में अपनी विकास यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है।
