भारत की वैश्विक भूमिका: ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात और ब्रिक्स सम्मेलन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बीच, रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों ने भारत का दौरा किया। यह घटनाक्रम ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शांति और व्यापार के महत्व पर जोर दिया। जानें कि कैसे भारत इस समय वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और क्या संकेत मिलते हैं इन मुलाकातों से।
 | 
भारत की वैश्विक भूमिका: ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात और ब्रिक्स सम्मेलन gyanhigyan

भारत में वैश्विक नेताओं की उपस्थिति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। इस दौरान ट्रंप का बयान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। वहीं, जब ट्रंप और जिनपिंग बातचीत कर रहे थे, रूस के विदेश मंत्री सरगई लवरोव भारत पहुंचे और कहा कि हिंदी-रूसी संबंध मजबूत हैं। दिल्ली का तापमान केवल मौसम के कारण नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय रणनीतिक गतिविधियों के कारण भी बढ़ा हुआ है। इस समय, दुनिया की नजरें नई दिल्ली पर हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने लवरोव और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराची उपस्थित थे। लेकिन सवाल यह है कि इस वैश्विक तनाव के बीच ये नेता अचानक भारत क्यों आए हैं?


दरअसल, ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में शुरू हो चुकी है, और प्रधानमंत्री मोदी ने इन मंत्रियों से मुलाकात की। यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं थी। जब ब्रिक्स के सदस्य एक साथ खड़े हुए, तो यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। एक ओर, रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है, दूसरी ओर, ईरान और इजराइल के बीच तनाव बढ़ रहा है।


अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे ये दोनों देश भारत में आकर पीएम मोदी से मिल रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि नई दिल्ली इस समय वैश्विक शांति के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ईरान के विदेश मंत्री का भारत आना यह संकेत देता है कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए भारत उनकी प्राथमिकता है, चाहे पश्चिम का दबाव कितना भी हो।


बैठक के पहले दिन, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी बात स्पष्टता से रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापारिक व्यवधानों का सामना कर रही है। जयशंकर ने ब्रिक्स देशों से आग्रह किया कि वे व्यावहारिक समाधान खोजें। उनका संदेश स्पष्ट था कि केवल बातचीत से काम नहीं चलेगा, बल्कि संघर्ष के बीच व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।


जयशंकर ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर देकर भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट किया। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब रेड सी और पश्चिम एशिया में तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। ईरान और इजराइल के बीच संभावित टकराव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत ने दुनिया को आगाह किया है कि आर्थिक अनिश्चितताएं और जलवायु चुनौतियां अब हमारे दरवाजे पर हैं। ब्रिक्स को स्थिरता लाने वाली शक्ति बनना होगा। यह 11 उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है। जब भारत इस समूह की अध्यक्षता करता है, तो वह केवल अपने हितों की रक्षा नहीं करता, बल्कि पूरी विकासशील दुनिया का नेतृत्व करता है।