भारत की विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में आतंकवाद और कूटनीति पर स्पष्ट रुख
भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक मीडिया ब्रीफिंग में आतंकवाद, पाकिस्तान, और कनाडा के मुद्दों पर अपने स्पष्ट रुख को साझा किया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति अडिग है और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार भारत के पास है। उन्होंने कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथियों पर चिंता जताई और पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के मुद्दे पर भी भारत का रुख स्पष्ट किया। इस ब्रीफिंग में ब्रिक्स की अध्यक्षता और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी चर्चा की गई।
| May 7, 2026, 18:21 IST
भारत का दृढ़ रुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर
भारतीय विदेश मंत्रालय ने आज अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के माध्यम से कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय विषयों पर भारत का स्पष्ट और मजबूत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इस ब्रीफिंग में आतंकवाद, पाकिस्तान, कनाडा, ब्रिक्स और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति पूरी तरह से स्पष्ट और अडिग है।
आपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ
विदेश मंत्रालय ने सबसे पहले ‘आपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ का उल्लेख किया। रणधीर जायसवाल ने कहा कि पूरी दुनिया ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की वास्तविकता को देखा और समझा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद का सख्त जवाब दिया। पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और देश वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ अभियान को और मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करेगा।
सिंधु जल संधि पर भारत का रुख
सिंधु जल संधि के संदर्भ में भी भारत ने अपना रुख दोहराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के कारण यह संधि फिलहाल स्थगित है। भारत ने स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय तरीके से आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक भारत का रुख नहीं बदलेगा। यह बयान दोनों देशों के बीच जारी तनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कनाडा के आरोपों का खंडन
कनाडा की खुफिया एजेंसी द्वारा भारत पर विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को विदेश मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करता है और दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि भारत की नीति अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना है। यदि किसी प्रकार की चिंता हो, तो उसे स्थापित संस्थागत तंत्रों के माध्यम से उठाया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक या सार्वजनिक आरोपों के जरिए।
खालिस्तानी चरमपंथ पर चिंता
हालांकि, भारत ने कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी संगठनों पर गंभीर चिंता भी व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडाई रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि कनाडा की जमीन का उपयोग कुछ समूह भारत के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं। भारत ने कनाडा सरकार से मांग की कि वह भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे। इसमें भारतीय राजनयिकों और नेताओं को धमकियां देना, पूजा स्थलों में तोड़फोड़, हिंसा का महिमामंडन और तथाकथित जनमत संग्रह के जरिए अलगाववाद को बढ़ावा देने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने की आवश्यकता बताई गई।
ब्रिक्स की अध्यक्षता और बैठकें
ब्रीफिंग में ब्रिक्स को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस वर्ष भारत ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इसके तहत विदेश मंत्रियों की बैठक सहित कई महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन बैठकों की तिथियों और औपचारिक पुष्टि को लेकर उचित समय पर विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। भारत की अध्यक्षता को ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल का बयान
नेपाल द्वारा लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर दिए गए बयान के संबंध में विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा वर्ष 1954 से इसी मार्ग से होती रही है और इसमें कुछ भी नया नहीं है। भारत ने संकेत दिया कि यह पारंपरिक और लंबे समय से प्रचलित मार्ग है, जिसे लेकर अनावश्यक विवाद की जरूरत नहीं है। इस ब्रीफिंग में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कठोर नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण, कनाडा में सक्रिय चरमपंथी तत्वों पर चिंता तथा क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका को मजबूती से सामने रखा।
