भारत की विदेश नीति: सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक शांति पर जोर

भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की विदेश नीति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने लेबनान में शांति मिशन, पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग, और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया। इस वार्ता में खाड़ी क्षेत्र में भारतीय समुदाय की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सुरक्षा मुद्दों पर भी जानकारी दी गई। जानें भारत की बहुआयामी विदेश नीति के बारे में और अधिक।
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भारत की विदेश नीति: सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक शांति पर जोर

भारत की विदेश नीति पर प्रेस वार्ता

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज आयोजित साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कई महत्वपूर्ण वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत की स्थिति को स्पष्ट किया। इस वार्ता में पश्चिम एशिया की स्थिति, पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता जैसे विषयों पर चर्चा की गई।


लेबनान में भारत की भूमिका

प्रवक्ता ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में लगभग 600 भारतीय सैनिक इस मिशन में तैनात हैं। भारत दशकों से शांति अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेता आ रहा है और यह संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़ा सैनिक योगदान देने वाला देश है। हाल ही में इस मिशन पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि इन हमलों में कई सैनिकों की जान गई है, जो अत्यंत दुखद है। भारत ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र मिशनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग

पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा सहयोग पर चर्चा करते हुए, प्रवक्ता ने बताया कि भारत 2007 से बांग्लादेश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है। इसके अलावा, हाल ही में श्रीलंका के अनुरोध पर उसे 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराए गए हैं। नेपाल और भूटान के साथ भी भारत का ऊर्जा सहयोग लगातार जारी है। मालदीव सरकार ने भी भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए संपर्क किया है, जिस पर भारत विचार कर रहा है।


भारतीय नागरिकों की सुरक्षा

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रवक्ता ने बताया कि ईरान से 204 भारतीय नागरिकों को स्थल मार्ग से अजरबैजान पहुंचाया गया है, जहां से उनकी स्वदेश वापसी हो रही है। इनमें से कई नागरिक लौट चुके हैं और बाकी अगले कुछ दिनों में लौटेंगे। उन्होंने अजरबैजान सरकार का आभार व्यक्त किया।


बहरीन प्रस्ताव पर भारत की स्थिति

बहरीन प्रस्ताव पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए, रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह प्रस्ताव वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विचाराधीन है। भारत का स्पष्ट मत है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार वाणिज्यिक जहाजरानी स्वतंत्र और सुरक्षित होनी चाहिए। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना आवश्यक है।


खाड़ी क्षेत्र में भारतीय समुदाय

खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और वे सभी सुरक्षित हैं। भारत के दूतावास लगातार उनके संपर्क में हैं। हालांकि, इस संघर्ष के दौरान अब तक आठ भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है और एक व्यक्ति लापता है। विदेश मंत्रालय, पोत परिवहन मंत्रालय और क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास मिलकर भारतीयों की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयास कर रहे हैं।


भारत की सक्रियता

ब्रिटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति पर चर्चा के लिए कई देशों को आमंत्रित किया है, जिसमें भारत भी शामिल है। इस बैठक में भारत की ओर से विदेश सचिव भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, भारत ईरान और अन्य संबंधित देशों के साथ संपर्क में है ताकि भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जा सके। हाल के प्रयासों के चलते छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं।


भारत की बहुआयामी विदेश नीति

कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय की इस प्रेस वार्ता में भारत की बहुआयामी विदेश नीति की झलक देखने को मिली, जिसमें वैश्विक शांति अभियानों में सक्रिय योगदान, क्षेत्रीय सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रतिबद्धता शामिल है।