भारत की विदेश नीति: ब्रिक्स से लेकर पड़ोसी देशों के साथ संबंधों तक

भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया। ब्रिक्स बैठक, पड़ोसी देशों के साथ संबंध, ऊर्जा सुरक्षा, और प्रधानमंत्री की प्रस्तावित विदेश यात्रा जैसे विषयों पर चर्चा की गई। जानें कैसे भारत अपने कूटनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है और ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रहा है।
 | 
भारत की विदेश नीति: ब्रिक्स से लेकर पड़ोसी देशों के साथ संबंधों तक gyanhigyan

भारत की विदेश नीति पर मीडिया ब्रीफिंग

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया। इस संवाददाता सम्मेलन में ब्रिक्स बैठक, पड़ोसी देशों के साथ संबंध, ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद, अवैध प्रवासन और प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा जैसे विषयों पर भारत की रणनीति और कूटनीतिक प्राथमिकताएं स्पष्ट की गईं।


ब्रिक्स बैठक का आयोजन

विदेश मंत्रालय ने बताया कि ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक 14 और 15 मई को दिल्ली में आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता भारत करेगा। प्रवक्ता ने कहा कि सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का चयन संबंधित देशों द्वारा किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिक्स का विस्तार सर्वसम्मति से होता है, और हाल के वर्षों में कजान और जोहानिसबर्ग बैठकों में नए देशों को शामिल किया गया है। भविष्य में सदस्यता विस्तार का निर्णय भी ब्रिक्स देशों की सामूहिक सहमति से ही होगा।


नेपाल के साथ संबंध

नेपाल के साथ संबंधों पर चर्चा करते हुए, रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते बहुआयामी हैं। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद, प्रधानमंत्री ने वहां के नेतृत्व से बातचीत की थी। उन्होंने बताया कि नेपाल की ओर से विदेश मंत्री को यात्रा का निमंत्रण मिला है, और तारीखें दोनों पक्षों की सुविधा के अनुसार तय की जाएंगी। इसके अलावा, नेपाल ने भारत से उर्वरकों की आपूर्ति का अनुरोध किया है, जिस पर मौजूदा सहयोग ढांचे के तहत कार्यवाही की जा रही है।


बांग्लादेश के साथ संबंध

बांग्लादेश के संदर्भ में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के संबंध सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री भारत आए थे, और वहां की नई सरकार के गठन से जुड़े कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व हुआ था। हालांकि, अवैध प्रवासन का मुद्दा अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में 2860 से अधिक लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए बांग्लादेश से अनुरोध किया है, जिन्हें भारत बांग्लादेशी नागरिक मानता है, लेकिन अब तक इस पर कोई जवाब नहीं मिला है।


ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का दृष्टिकोण

ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर, भारत ने स्पष्ट किया कि 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा स्रोतों के चयन में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेगा। सरकार वैश्विक परिस्थितियों और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लेती है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत पड़ोसी देशों को ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति लगातार कर रहा है। बांग्लादेश को मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से डीजल भेजा जा रहा है, जबकि भूटान, नेपाल और श्रीलंका को भी विभिन्न व्यवस्थाओं के तहत ऊर्जा उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं।


प्रधानमंत्री की प्रस्तावित विदेश यात्रा

प्रधानमंत्री की पांच देशों की प्रस्तावित यात्रा के बारे में विदेश मंत्रालय ने कहा कि पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात होगा। इस दौरान ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री नॉर्वे, स्वीडन, इटली और नीदरलैंड की यात्रा करेंगे। इन देशों को नवाचार, हरित ऊर्जा और स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बताया गया है। भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करना चाहता है।


चाबहार बंदरगाह और चागोस द्वीप समूह

चाबहार बंदरगाह के मुद्दे पर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस विषय पर ईरान और अमेरिका दोनों के साथ बातचीत जारी है। वर्तमान क्षेत्रीय संघर्षों के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है। वहीं, चागोस द्वीप समूह के प्रश्न पर भारत ने एक बार फिर मॉरीशस की संप्रभुता का समर्थन दोहराया।


ऑपरेशन सिंदूर पर प्रतिक्रिया

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन की ओर से जमीन पर समर्थन मिलने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सामने आई रिपोर्टें पहले से ज्ञात तथ्यों की पुष्टि करती हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए चलाया गया एक सटीक और संतुलित अभियान था। जिम्मेदार देशों को यह विचार करना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे को संरक्षण देने की कोशिशें उनकी वैश्विक छवि को किस प्रकार प्रभावित करती हैं।


मितव्ययिता अभियान

विदेश मंत्रालय ने देश में मितव्ययिता अभियान पर भी जोर दिया। प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरे देश से बचत और जिम्मेदार नागरिक के रूप में योगदान देने की अपील की है। यह केवल किसी एक मंत्रालय का विषय नहीं बल्कि पूरे देश का सामूहिक प्रयास है।