भारत की विदेश नीति पर एस जयशंकर का स्पष्ट दृष्टिकोण

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने IIT मद्रास में भारत की विदेश नीति पर अपने विचार साझा किए, जिसमें पड़ोसी देशों के साथ संबंध, आतंकवाद, और तकनीकी आत्मनिर्भरता शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा और जल बंटवारे जैसे मुद्दों को आतंकवाद से जोड़ते हुए नई वास्तविकताओं को स्वीकार किया है। जयशंकर का यह बयान भारत की नई विदेश नीति का घोषणापत्र बनता है, जो आत्मविश्वास और सामरिक स्पष्टता पर आधारित है।
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भारत की विदेश नीति पर एस जयशंकर का स्पष्ट दृष्टिकोण

विदेश मंत्री का स्पष्ट रुख

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने IIT मद्रास में एक कार्यक्रम के दौरान भारत की विदेश नीति, पड़ोसी देशों के साथ संबंध, राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक भू-राजनीति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत जीवन के संतुलन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत उन प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो आधुनिक राष्ट्र के रूप में उभरी हैं, और यही ऐतिहासिक निरंतरता भारत की वैश्विक पहचान का आधार है।


पड़ोसी देशों के साथ संबंध

पड़ोसी देशों के संबंधों पर चर्चा करते हुए, जयशंकर ने कहा कि भारत को अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के पड़ोसी मिले हैं। पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई देश जानबूझकर आतंकवाद को अपनी नीति बनाता है, तो भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को यह तय करने का अधिकार है कि वह कब और कैसे कार्रवाई करेगा, और कोई बाहरी शक्ति भारत को निर्देशित नहीं कर सकती।


जल बंटवारे पर विचार

जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर जयशंकर ने कहा कि अच्छे पड़ोसी संबंध एकतरफा नहीं हो सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आतंकवाद जारी रहता है, तो अच्छे पड़ोसीपन की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोई भी देश यह नहीं कह सकता कि वह आतंकवाद को जारी रखे और साझा संसाधनों का लाभ भी उठाए।


बांग्लादेश में अस्थिरता

बांग्लादेश में हालिया अस्थिरता पर, जयशंकर ने बताया कि उन्होंने हाल ही में वहां यात्रा की और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों के प्रति सहयोगी है और जहां भी अच्छे पड़ोसीपन की भावना होती है, वहां भारत निवेश और सहायता करता है।


अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा

अरुणाचल प्रदेश से संबंधित एक मामले पर, जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह भारत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की चालबाजी से वास्तविकता नहीं बदलेगी और भारत ने हालिया घटनाओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।


वैश्विक स्थिति पर विचार

वैश्विक स्थिति पर, जयशंकर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कई भ्रम टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि लंबे युद्ध अब संभव नहीं हैं, लेकिन वर्तमान में एक युद्ध चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक व्यापार की आपसी निर्भरता ने बड़े जोखिमों को नहीं रोका है।


तकनीकी आत्मनिर्भरता

तकनीक के संदर्भ में, जयशंकर ने कहा कि भारत ने 3जी और 4जी तकनीकें बाहर से लीं, लेकिन 5जी के समय यह समझ आया कि बाहरी निर्भरता एक बड़ा खतरा है। इस सोच के चलते आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं।


व्यक्तिगत जीवन का संतुलन

अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में, जयशंकर ने कहा कि उनके लिए कोई ऑफ डे नहीं होता। उन्होंने बताया कि वह संगीत सुनते हैं, किताबें पढ़ते हैं, फिल्में देखते हैं और खेल देखते हैं ताकि जीवन में संतुलन बना रहे।


भारत की नई विदेश नीति

जयशंकर के विचारों से स्पष्ट होता है कि भारत किसी भ्रम में नहीं है। पड़ोसी देशों और आतंकवाद पर उनके बयान स्पष्ट और आक्रामक हैं। यह संदेश केवल एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है कि भारत अब अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। जल बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों को आतंकवाद से जोड़ना दर्शाता है कि भारत पुराने समझौतों को नई वास्तविकता के अनुसार देख रहा है।