भारत की विदेश नीति: क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
भारत की विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में आयोजित साप्ताहिक ब्रीफिंग में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत की स्पष्ट और संतुलित नीति को प्रस्तुत किया। इस ब्रीफिंग में पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, पड़ोसी देशों के साथ संबंध, प्रत्यर्पण मामलों और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
इजराइल-लेबनान संघर्षविराम पर भारत का रुख
भारत ने इजराइल और लेबनान के बीच संघर्षविराम को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए इसे शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का स्वागत करता है जो क्षेत्र में स्थिरता और शांति को बढ़ावा देते हैं। वहीं, हमास के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि भारत के पास इस विषय को संभालने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है।
पड़ोसी देशों को ऊर्जा सहायता
भारत ने यह स्पष्ट किया है कि वह अपने संसाधनों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पड़ोसी देशों को ऊर्जा सहायता प्रदान कर रहा है। बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मॉरीशस और सेशेल्स जैसे देशों के साथ इस दिशा में सहयोग जारी है।
शेख हसीना मामले पर भारत का रुख
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़े मामले पर प्रवक्ता ने बताया कि भारत को प्राप्त अनुरोध न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विचाराधीन है। भारत इस मुद्दे पर सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी
ईरान में संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के संबंध में विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि अब तक 2361 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया गया है, जिनमें 1141 छात्र शामिल हैं। इसके अलावा, तीन विदेशी नागरिकों को भी सहायता प्रदान की गई।
नीरव मोदी का प्रत्यर्पण
आर्थिक अपराधी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के संबंध में प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस मुद्दे पर ब्रिटेन के साथ लगातार संपर्क में है और सरकार का उद्देश्य सभी भगोड़ों को कानून के दायरे में लाना है।
पाकिस्तान की टिप्पणियों का खंडन
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े आंतरिक मामलों पर पाकिस्तान की टिप्पणियों को भारत ने सख्ती से खारिज किया। प्रवक्ता ने कहा कि ये क्षेत्र भारत के अभिन्न अंग हैं और पाकिस्तान को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।
जलवायु परिवर्तन पर भारत की प्रतिबद्धता
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत ने तीसरे वैश्विक सम्मेलन से हटने के बावजूद अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह अपने हरित लक्ष्यों को पूरा करने में अग्रणी रहा है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रयास जारी रखेगा।
ऊर्जा संकट पर भारत की भूमिका
भारत को ऊर्जा संकट और होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा आमंत्रित किया गया है। वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग ने यह स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक मंच पर संतुलित, जिम्मेदार और सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जहां शांति, सहयोग और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
