भारत की भूमिका: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक बदलाव और महासागरों का महत्व

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों और महासागरों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत को इस बदलती भू-राजनीति में आत्मविश्वास और क्षमता के साथ नेतृत्व करना चाहिए। सिंह ने ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के प्रभावों पर भी चर्चा की। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत पर हमले का उल्लेख नहीं किया, जो क्षेत्र में तनाव को बढ़ाता है। जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर और क्या कहा गया।
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भारत की भूमिका: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक बदलाव और महासागरों का महत्व

पश्चिम एशिया में संघर्ष और भारत की जिम्मेदारी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बीच महासागरों का महत्व एक बार फिर से उभरकर सामने आया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को आत्मविश्वास और क्षमता के साथ नेतृत्व करने की आवश्यकता है।


सिंह ने एक कार्यक्रम में कहा कि पश्चिम एशिया में हो रही घटनाएं 'असामान्य' हैं और इनका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'इस समय यह कहना मुश्किल है कि पश्चिम एशिया में हालात किस दिशा में बढ़ेंगे।'


अन्य क्षेत्रों में भी आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान


उन्होंने आगे कहा, 'यदि हम होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी के क्षेत्र को देखें, तो यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब यहां अशांति होती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है।'


सिंह ने यह भी बताया कि वर्तमान में केवल ऊर्जा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं देखी जा रही हैं। इन अनिश्चितताओं का सीधा प्रभाव वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।


उन्होंने महासागरों के महत्व को फिर से रेखांकित करते हुए कहा कि भारत को एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में आत्मविश्वास और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ नेतृत्व करना चाहिए।


ईरानी युद्धपोत पर अमेरिका का हमला

हालांकि, रक्षा मंत्री ने दो दिन पहले श्रीलंका के तट के पास अमेरिका द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोने की घटना का उल्लेख नहीं किया। ईरानी युद्धपोत 'आईरिस देना' भारत द्वारा आयोजित 'मिलन' बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। इस हमले में 87 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए। यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाती है।


अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने इजराइल और कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष काफी बढ़ गया है।