भारत की नई सुरक्षा नीति: पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम

भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं। कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान की हरकतों के बाद, भारतीय प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि अब कोई भी आतंकवादी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जानें कैसे भारत ने अपने आक्रामक रुख को अपनाया और पाकिस्तान को जवाब दिया।
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भारत की नई सुरक्षा नीति: पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम

कश्मीर में पाकिस्तान की हरकतों का जवाब

कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान द्वारा की गई गतिविधियों के बाद भारत में निराशा का माहौल था। लेकिन अब पूरा देश अपने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दे रहा है। भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर तीन अलग-अलग प्रधानमंत्रियों को उनकी वास्तविकता का एहसास कराया। उरी हमले के बाद नवाज शरीफ को सबक सिखाया गया, और पुलवामा हमले के बाद इमरान खान के शासन में ऐसा तांडव मचाया गया कि पाकिस्तान की सेना और सरकार दोनों हिल गईं। पहलगाम में भारतीयों में जो गुस्सा था, उसे समझते हुए, भारत ने पाकिस्तान को वह जवाब दिया जिसका देश लंबे समय से इंतजार कर रहा था। आतंकवादियों के खिलाफ बदला लिया गया, और 22 अप्रैल को मिली चेतावनी का जवाब 7 मई को दिया गया। 9 मिसाइलों की आवाज के साथ रावलपिंडी से लेकर बहावलपुर, मुजफ्फराबाद और मीरपुर तक के ठिकानों को नष्ट कर दिया गया।


आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि पुलवामा और उरी हमलों के बाद जो कार्रवाई की गई थी, वह इससे भी बड़ी होगी। ऑपरेशन सिंदूर की खबर के बाद भारतीय सेना का सम्मान बढ़ा है, और मोदी जी के प्रति देशवासियों का आभार व्यक्त किया जा रहा है। पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां प्रधानमंत्री बदलते रहते हैं, लेकिन आतंकवाद के प्रति उनकी नीति में कोई बदलाव नहीं आता। नवाज शरीफ के समय भारत ने उरी का सामना किया, इमरान खान के समय पुलवामा जैसी साजिश को झेला, और अब शहबाज शरीफ के समय पहलगाम की घटना हुई। हर बार पाकिस्तान की यही कहानी होती है।


भारत की नई छवि: सॉफ्ट नेशन से सख्त राष्ट्र

सॉफ्ट नेशन की धारणा का अर्थ है कि एक देश अपनी विदेश नीति में आक्रामकता नहीं दिखाता। विशेष रूप से आतंकवाद और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में भारत ने पहले काफी संयम रखा। गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका और वैश्विक संघर्षों में तटस्थता ने इसे एक 'नरम' देश के रूप में प्रस्तुत किया। लेकिन 21वीं सदी में भारत की नीतियों और सैन्य कार्रवाइयों में बदलाव ने इस धारणा को कमजोर किया है। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 का बालाकोट हवाई हमला, और 2025 का 'ऑपरेशन सिंदूर' भारत के आक्रामक रुख को दर्शाते हैं।