भारत की नई विदेश नीति: मोदी और योगी की वैश्विक रणनीति
भारत की नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक स्पष्ट और आक्रामक विदेश नीति के साथ निवेश कूटनीति का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है, जो नए भारत की दिशा को निर्धारित कर रहा है। मोदी वैश्विक स्तर पर भारत की सामरिक स्वायत्तता और तकनीकी शक्ति को प्रदर्शित कर रहे हैं, जबकि योगी राज्य को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए विश्व के निवेश केंद्रों में सक्रियता से भाग ले रहे हैं। दोनों नेताओं के विदेश दौरे एक सुविचारित रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें भारत को वैश्विक शक्ति और उत्तर प्रदेश को औद्योगिक इंजन बनाने का स्पष्ट रोडमैप शामिल है.
मोदी का इजराइल दौरा
प्रधानमंत्री मोदी आज तेल अवीव पहुंचकर पश्चिम एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे हैं। इजराइली मीडिया में उनकी तस्वीर और 'वेलकम मोदी' शीर्षक इस बात का संकेत है कि यह दौरा ऐतिहासिक है। मोदी इजराइल की संसद Knesset को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे। यह उनका इजराइल का दूसरा दौरा है, जिसमें रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सहयोग और सीमा पार भुगतान प्रणाली जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.
योगी की एशियाई यात्रा
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर और जापान की यात्रा का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। सिंगापुर में उन्होंने कई प्रमुख कंपनियों के साथ बैठकें कीं, जिसमें डेटा सेंटर, एग्री बिजनेस, लॉजिस्टिक्स, सोलर एनर्जी, फिनटेक और स्टार्टअप निवेश पर चर्चा की गई। जापान में, उन्होंने प्रमुख कंपनियों के साथ संवाद किया और ग्रीन हाइड्रोजन, ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पर जोर दिया.
भारत की दोहरी कूटनीति
मोदी पश्चिम एशिया में सुरक्षा और तकनीकी सहयोग का संदेश दे रहे हैं, जबकि योगी पूर्वी एशिया में औद्योगिक विस्तार का एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। इजराइल के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया जा रहा है, जबकि सिंगापुर और जापान से निवेश और तकनीक को आकर्षित करने की तैयारी है। यह दोहरी कूटनीति दर्शाती है कि भारत अब बहुस्तरीय वैश्विक रणनीति पर काम कर रहा है.
राजनीतिक प्रभाव
इन दोनों यात्राओं का भारत की घरेलू राजनीति पर भी प्रभाव पड़ेगा। मोदी अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत नेता की छवि को और मजबूत कर रहे हैं, जिससे विपक्ष के नैरेटिव को चुनौती मिलेगी। योगी अपने राज्य में विकास और निवेश के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे रोजगार और उद्योग में वृद्धि की संभावना है.
निष्कर्ष
इस प्रकार, एक ओर भारत की वैश्विक रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन हो रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। यह स्पष्ट संदेश है कि भारत अब निर्णायक शक्ति बनने की राह पर है.
