भारत की नई नीति: कोयला गैसीकरण से यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता

भारत सरकार ने कोयला गैसीकरण पर आधारित यूरिया उत्पादन के लिए नई नीति लाने की योजना बनाई है। इस पहल का उद्देश्य आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता को कम करना और देश में ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है। वर्तमान में, भारत यूरिया उत्पादन के लिए 25% गैस का आयात करता है। नई नीति के तहत, घरेलू कोयले का उपयोग बढ़ाने और यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी कंपनियों की रुचि भी इस क्षेत्र में बढ़ रही है, जिससे देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
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भारत की नई नीति: कोयला गैसीकरण से यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता gyanhigyan

भारत सरकार की नई पहल

भारत सरकार जल्द ही कोयला गैसीकरण पर आधारित यूरिया उत्पादन के लिए एक नई नीति पेश करने जा रही है। इस नीति का उद्देश्य देश की आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता को कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है। वर्तमान में, भारत यूरिया उत्पादन के लिए आवश्यक लगभग 25% प्राकृतिक गैस का आयात करता है। नई नीति के माध्यम से घरेलू कोयले का उपयोग बढ़ाने, यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा.


कोयला गैसीकरण तकनीक का महत्व

भारत की नई नीति: कोयला गैसीकरण से यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता
यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत! सरकार तैयार कर रही है ‘कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया’ के लिए नई पॉलिसी


कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित एक रोडशो में अधिकारियों ने बताया कि भारत वर्तमान में यूरिया उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का उपयोग करता है, जिसमें से लगभग 25% गैस आयात करनी पड़ती है। ऐसे में कोयला गैसीकरण तकनीक देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.


कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया तकनीक क्या है?

इस तकनीक में कच्चे कोयले और पेट कोक को उच्च तापमान पर ऑक्सीकरण करके सिंथेटिक गैस, जिसे सिंगैस कहा जाता है, तैयार की जाती है। इस गैस में हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड होते हैं। इसके बाद, हवा से प्राप्त नाइट्रोजन के साथ हाइड्रोजन को मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है, और फिर कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से यूरिया का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्राकृतिक गैस के बजाय कोयले का उपयोग किया जाता है, जिससे गैस आयात पर निर्भरता कम होगी और देश के विशाल कोयला भंडार का उपयोग बढ़ेगा.


रसायन और उर्वरक मंत्रालय की भूमिका

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि रसायन और उर्वरक मंत्रालय हाल ही में नई यूरिया नीति पर काम कर रहा है। वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया को तेज किया गया है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि नई नीति में कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया उत्पादन को शामिल किया जाए.


निजी कंपनियों की रुचि

महाराष्ट्र की न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन कंपनी ने सरकार से अनुरोध किया है कि कोयला आधारित यूरिया परियोजनाओं को गैस आधारित संयंत्रों के समान सुविधाएं प्रदान की जाएं। कंपनी ने ऑफटेक एश्योरेंस और अलग क्षमता आवंटन की भी मांग की है। यह कंपनी महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती में 1.27 एमएमटीपीए क्षमता का कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया प्लांट स्थापित करने की योजना बना रही है। सरकार का मानना है कि ऐसी परियोजनाएं देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा की बचत में भी मदद करेंगी.


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