भारत की नई एंटी-टैंक मिसाइल का सफल परीक्षण, आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) के सफल परीक्षण पर बधाई दी। यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जानें इस मिसाइल की विशेषताएँ, विकास प्रक्रिया और इसके युद्ध संचालन में उपयोग के बारे में।
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भारत की नई एंटी-टैंक मिसाइल का सफल परीक्षण, आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम

रक्षा मंत्री का बधाई संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) के सफल परीक्षण के बाद रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और इसके उद्योग सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।


सफल परीक्षण की जानकारी

भारत के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने गतिशील लक्ष्य पर इस मिसाइल का सफल परीक्षण किया। राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और उद्योग भागीदारों को सराहा।


मिसाइल की विशेषताएँ

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एमपीएटीजीएम का परीक्षण 11 जनवरी, 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर में किया गया। यह स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइल इमेजिंग इन्फ्रारेड (आईआईआर) होमिंग सीकर, ऑल-इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम, और उच्च प्रदर्शन लक्ष्य प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है।


उपयोग और विकास

थर्मल टारगेट सिस्टम को जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है, जो लक्ष्य टैंक का अनुकरण करता है। यह मिसाइल दिन-रात दोनों समय युद्ध संचालन में सक्षम है और आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों को नष्ट करने की क्षमता रखती है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस प्रणाली के विकास में शामिल हैं।