भारत की जल विद्युत परियोजनाओं से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर कदम
चिनाब बेसिन की जल विद्युत परियोजनाओं की समीक्षा
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने चिनाब बेसिन में जल विद्युत परियोजनाओं की समीक्षा की है, जिसमें सावलकोट परियोजना से 800 मेगावॉट बिजली उत्पादन को प्राथमिकता दी गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत अब अपने प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में कोई संकोच नहीं कर रहा है। खट्टर ने अपने दौरे के दौरान राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) द्वारा विकसित सावलकोट परियोजना से 800 मेगावॉट बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना बन रही है, जिसका उद्देश्य न केवल विद्युत उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि क्षेत्र की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करना है.
अन्य परियोजनाओं पर ध्यान
खट्टर ने NHPC द्वारा चलाए जा रहे अन्य प्रोजेक्ट्स, जैसे सेलाल पावर प्रोजेक्ट और रैटल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर भी ध्यान दिया। उन्होंने रैटल परियोजना के डैम कंक्रीटिंग कार्य का शिलान्यास किया और इंजीनियरों से समय पर और गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने का आग्रह किया। इसके साथ ही, सेलाल परियोजना में जमा तलछट को हटाने के लिए अधिकारियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए, ताकि जल भंडारण क्षमता अधिकतम हो सके.
पाकिस्तान की आपत्तियों का खंडन
खट्टर ने स्पष्ट किया कि इन विद्युत परियोजनाओं के लिए पाकिस्तान की कोई आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने Indus Waters Treaty (1960) का हवाला देते हुए कहा कि अब भारत पश्चिमी नदियों के पानी का उपयोग अपने लोगों और उद्योगों के लिए करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं में किसी भी अवैध तत्व या ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) को शामिल नहीं होने दिया जाएगा.
भौगोलिक संतुलन और जल-संरचना
जम्मू और कश्मीर में बड़े जल विद्युत प्रोजेक्टों को आगे बढ़ाना चीन और पाकिस्तान जैसी पड़ोसी शक्तियों के साथ भौगोलिक संतुलन बनाए रखने का एक प्रयास है। सावलकोट, रैटल और सेलाल जैसे प्रोजेक्ट केवल बिजली उत्पादन के लिए नहीं हैं; वे चिनाब नदी के जल भंडारण और नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक अवसंरचना केंद्र हैं.
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
ऊर्जा उत्पन्न करने की यह क्षमता जम्मू एवं कश्मीर को देश के ऊर्जा नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में स्थापित करेगी। 800 मेगावॉट या उससे अधिक उत्पादन से न केवल स्थानीय आबादी को स्थिर बिजली मिलेगी, बल्कि पूरे उत्तर भारत की ऊर्जा मांगों को भी पूरा किया जा सकेगा.
पाकिस्तान की स्थिति
भारत ने दशकों तक संयम दिखाया, लेकिन अब वह स्पष्ट कर रहा है कि पाकिस्तान को समझना होगा कि समय बदल चुका है। सिंधु जल संधि के तहत भारत को जो अधिकार मिले हैं, उनका उपयोग अब वास्तविकता में दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान की कृषि, बिजली उत्पादन और सामाजिक संतुलन सब कुछ सिंधु प्रणाली पर निर्भर है.
जल विद्युत परियोजनाओं का सामाजिक प्रभाव
जब भारत चिनाब पर भंडारण बढ़ाता है और जलाशयों की क्षमता को अधिकतम करता है, तो यह पाकिस्तान के लिए एक सख्त संदेश है। इसके साथ ही, जब बिजली, उद्योग और रोजगार बढ़ते हैं, तो अलगाव की राजनीति अपने आप कमजोर पड़ती है.
