भारत की चीन पर कड़ी प्रतिक्रिया: पाकिस्तान को तकनीकी सहायता देने के आरोप

भारत ने हाल ही में उन रिपोर्टों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिनमें दावा किया गया था कि चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की थी। विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर स्पष्टता दी है कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था। इस बीच, चीनी अधिकारियों ने भी इस संबंध में अपने विचार साझा किए हैं। जानें इस विवादास्पद मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने मंगलवार को उन रिपोर्टों पर कड़ा जवाब दिया है, जिनमें कहा गया था कि चीन ने पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सहायता की थी। भारत ने यह स्पष्ट किया कि जो देश इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त हैं, उन्हें यह सोचने की आवश्यकता है कि इससे उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर क्या असर पड़ता है। यह बयान तब आया जब एक चीनी अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के दौरान चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की थी।


विदेश मंत्रालय की टिप्पणी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत ने उन रिपोर्टों को देखा है जो पहले से ज्ञात तथ्यों की पुष्टि करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम में हुए आतंकी हमलों का एक सटीक और सुनियोजित जवाब था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें यह विचार करना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे का समर्थन करना उनकी प्रतिष्ठा को कैसे प्रभावित करता है।


पाकिस्तान में आतंकवादी हमले का संदर्भ

22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में लश्कर से जुड़े आतंकवादियों द्वारा 26 पर्यटकों की हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई शुरू की। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह चीनी मीडिया में एक साक्षात्कार में, चीन के विमानन उद्योग निगम के इंजीनियर झांग हेंग ने पाकिस्तान में चीनी भागीदारी के बारे में चर्चा की।


चीन की तकनीकी सहायता

झांग हेंग ने बताया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान करने वाले लोगों में से एक थे। उन्होंने कहा कि सहायता केंद्र पर, हम अक्सर लड़ाकू विमानों की उड़ान और हवाई हमले के सायरन की आवाज सुनते थे। मई में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाता था, जो हमारे लिए मानसिक और शारीरिक रूप से एक कठिन परीक्षा थी।