भारत की कूटनीतिक स्थिति: अमेरिका और चीन के साथ स्पष्ट रुख

भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल ही में अमेरिका और चीन के साथ अपने कूटनीतिक रुख को स्पष्ट किया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार समझौते और चीन की आक्रामक गतिविधियों पर भारत की स्थिति को साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के मुद्दे पर भी भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। इस ब्रीफिंग में भारत की बदलती कूटनीतिक मुद्रा और वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
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भारत की कूटनीतिक स्थिति: अमेरिका और चीन के साथ स्पष्ट रुख

भारत का सख्त कूटनीतिक रुख

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में आयोजित साप्ताहिक ब्रीफिंग में भारत की स्थिति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, चीन-पाकिस्तान संबंध, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले, वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं और कूटनीतिक मर्यादा जैसे मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की नीति को किसी भी दबाव या दुष्प्रचार से प्रभावित नहीं किया जा सकता।




अमेरिकी कांग्रेस द्वारा भारत पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को वैश्विक बाजार की स्थितियों के अनुसार विभिन्न स्रोतों से पूरा करता है। प्रवक्ता ने बताया कि 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है और किसी भी देश के दबाव के कारण भारत अपने नागरिकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।


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भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते पर विदेश मंत्रालय ने हालिया अमेरिकी बयानों को गलत बताया। प्रवक्ता ने कहा कि पिछले वर्ष फरवरी से दोनों देशों के बीच एक संतुलित और पारस्परिक लाभकारी समझौते पर बातचीत चल रही है, और कई बार वे सहमति के करीब भी पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत हुई है, जो यह दर्शाता है कि दोनों नेताओं के बीच संवाद है।




चीन की आक्रामक गतिविधियों पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। शक्सगाम घाटी में चीन द्वारा सीपेक के तहत बुनियादी ढांचे के निर्माण को भारत ने अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि 1963 का चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता अवैध है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और चीन को चेतावनी दी गई है कि वह जमीनी हकीकत को बदलने का प्रयास न करे।




बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के मुद्दे पर भारत ने वहां की सरकार के इंकार को खतरनाक प्रवृत्ति बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह का इंकार अपराधियों का मनोबल बढ़ाता है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय ने संयमित लेकिन कड़ा संदेश दिया कि किसी भी लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। सिंधु जल संधि पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल स्थगन की स्थिति में है।




भारत ने यह भी कहा कि कई वैश्विक संस्थाओं के अमेरिका से बाहर जाने पर वैश्विक समस्याओं का समाधान परामर्श और सहयोग से ही संभव है। जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज 12 और 13 जनवरी को भारत यात्रा पर आ रहे हैं, जिसमें अहमदाबाद में द्विपक्षीय वार्ता होगी।




विदेश मंत्रालय की यह ब्रीफिंग भारत की बदलती कूटनीतिक मुद्रा को दर्शाती है। भारत न तो दबाव में आता है और न ही अस्पष्टता में जवाब देता है। अमेरिका या चीन, भारत अपनी प्राथमिकताएं और सीमाएं स्पष्ट रूप से निर्धारित कर रहा है। 500 प्रतिशत शुल्क की धमकी हो या रूसी तेल पर उपदेश, भारत का जवाब स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।




अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता पर तथ्य प्रस्तुत कर भारत ने यह भी दिखाया कि दुष्प्रचार का जवाब आंकड़ों और संवाद से दिया जा सकता है। मोदी और ट्रंप के आठ संवाद यह साबित करते हैं कि ऐसे दावे गलत हैं कि मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया, जिससे भारत और अमेरिका के व्यापार वार्ता प्रभावित हुई।