भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अंगोला से गैस खरीदने की नई रणनीति
भारत ने खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए अंगोला से रसोई गैस खरीदने की योजना बनाई है। यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और गैस संकट को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जानें कि क्यों अंगोला को चुना गया और इससे भारत की ऊर्जा रणनीति में क्या बदलाव आएंगे।
| Apr 2, 2026, 02:01 IST
भारत की नई ऊर्जा रणनीति
जब रास्ते बंद होते हैं, तो समझदारी से काम लेने वाले देश नए विकल्प खोज लेते हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष, हॉर्मोज स्ट्रेट पर बढ़ते खतरे और भारत में गैस की कमी के बीच, अब एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। भारत ने खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने का निर्णय लिया है और अब उसकी नजर अफ्रीका के एक कम चर्चित देश, अंगोला पर है। हां, भारत अब अंगोला से रसोई गैस (एलपीजी) खरीदने की योजना बना रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि अंगोला को ही क्यों चुना गया? क्या इससे गैस संकट का समाधान होगा? क्या यह भारत की ऊर्जा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा? दरअसल, ईरान युद्ध और हॉर्मोज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव के कारण भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती है। वर्तमान में, भारत अपनी लगभग 92% एलपीजी सप्लाई खाड़ी देशों से प्राप्त करता है, जैसे कि यूएई, कतर, सऊदी अरब और कुवैत। इन सभी सप्लाई का एकमात्र मार्ग हॉर्मोज स्ट्रेट है, जो केवल 33 किलोमीटर चौड़ा है। यह मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस व्यापार का भी रास्ता है। यदि यह मार्ग बंद होता है, तो इसका सीधा असर भारत के रसोईघरों पर पड़ेगा। यही कारण है कि भारत ने अपनी नई रणनीति पर काम करना शुरू किया है। सरकारी कंपनियां, जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल और गेट, अब अंगोला की सरकारी कंपनियों से एलपीजी खरीदने के लिए बातचीत कर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भारत एक दीर्घकालिक समझौते पर विचार कर रहा है, जिससे वह एक ही क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
अंगोला से गैस की आपूर्ति
भारत और अंगोला के बीच पहले से ही तेल व्यापार होता रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंगोला से आने वाला जहाज हॉर्मोज स्ट्रेट से नहीं गुजरेगा, बल्कि सीधे अटलांटिक और अरब सागर के रास्ते भारत पहुंचेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अंगोला से गैस केवल 12 से 18 दिन में भारत पहुंच सकती है, जो अमेरिका से आने वाली गैस की तुलना में 10 से 15 दिन तेज है। इसका मतलब है कि तेज आपूर्ति, कम जोखिम और बेहतर विकल्प। आंकड़ों पर गौर करें: वर्ष 2024-25 में भारत ने 31.32 मिलियन टन एलपीजी का उपयोग किया, जबकि उत्पादन केवल 12.79 मिलियन टन पर सीमित है। इसका मतलब है कि भारत को बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ता है। मांग बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन नहीं हो रहा है, यही कारण है कि भारत को नए स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है।
सरकार के कदम
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हॉर्मोज स्ट्रेट के बंद होने की स्थिति में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। तेल एवं गैस मंत्रालय ने कहा है कि सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। मंत्रालय ने सिटी गैस वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ रेस्टोरेंट, होटलों और कैंटीन जैसे वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन देने को प्राथमिकता दें, ताकि वाणिज्यिक एलपीजी की उपलब्धता से जुड़ी चिंताओं को दूर किया जा सके। इसके साथ ही, नैशनल पीएनजी ड्राइव 2.0 की अवधि को अब 30 जून तक बढ़ा दिया गया है, जिससे पीएनजी नेटवर्क को बढ़ावा मिल सके। यह अभियान इस साल की पहली जनवरी को शुरू हुआ था और इसकी अवधि 31 मार्च को समाप्त होने वाली थी।
