भारत की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक संघर्ष का प्रभाव: पीयूष गोयल का बयान

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में भारत की अर्थव्यवस्था पर चल रहे वैश्विक संघर्ष के अप्रत्यक्ष प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता और व्यापार कूटनीति में भारत की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। गोयल ने बताया कि भारत ने 38 विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे भारतीय किसानों और कारीगरों को वैश्विक बाजारों में पहुंच मिली है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं की क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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वैश्विक संघर्ष के प्रभावों पर चर्चा

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को भारत की व्यापारिक स्थिति और अर्थव्यवस्था पर चल रहे वैश्विक संघर्ष के अप्रत्यक्ष प्रभावों पर प्रकाश डाला। नई दिल्ली में मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स की राष्ट्रीय सीएसआर योजना 2026-27 के शुभारंभ के दौरान गोयल ने कहा कि भारत युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन इसके अप्रत्यक्ष नुकसान से बचना संभव नहीं है। उन्होंने डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि युद्ध चल रहा है, और भारत इससे प्रभावित हो रहा है।


 


मंत्री ने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह समय है जब देश को एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करना होगा। गोयल ने व्यापार कूटनीति में भारत की प्रगति को भी उजागर किया, यह बताते हुए कि देश ने 38 विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से भारत को तरजीही बाजार पहुंच प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि इन बाजारों में कम या शून्य शुल्क है।


 


गोयल ने विस्तार से बताया कि वैश्विक व्यापार का दो-तिहाई हिस्सा भारतीय किसानों, कारीगरों और कंपनियों के लिए कम या बिना शुल्क के उपलब्ध है, जिससे उन्हें महत्वपूर्ण अवसर मिलते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के किसानों, मछुआरों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और हस्तशिल्प कारीगरों को विश्व के दो-तिहाई बाजारों तक पहुंच प्राप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि जब हम गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करेंगे, तभी हम अच्छी गुणवत्ता वाली सेवाएं प्रदान कर पाएंगे।


 


उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं की क्षमताओं को बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया। गोयल ने कहा कि यदि हम बच्चों की क्षमताओं को प्रोत्साहित करेंगे, तो भारत तेजी से विकास करेगा और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।