भारत की BRICS बैठक में वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा
विदेश मंत्री का संबोधन
गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत के दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के बीच, BRICS उन देशों के लिए एक सहारा बन सकता है जो ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
सहयोग और समावेशिता पर जोर
बैठक में, जयशंकर ने BRICS के भीतर सहयोग की बढ़ती भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब तक सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से 80 से अधिक बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिससे आपसी संबंध मजबूत हुए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत अध्यक्ष के रूप में साझेदार देशों के साथ संवाद को बढ़ावा दे रहा है, ताकि एक समावेशी और सहयोगी ढांचा विकसित किया जा सके।
जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि समूह की प्रगति के लिए नए और बाद में शामिल होने वाले सदस्यों को BRICS की स्थापित आम सहमति का समर्थन करना आवश्यक है।
वैश्विक उथल-पुथल और BRICS की भूमिका
विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि यह बैठक अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारी उथल-पुथल के समय में हो रही है। उन्होंने उन कारकों का उल्लेख किया जो वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को प्रभावित कर रहे हैं, जैसे कि विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितता, और व्यापार एवं तकनीक में नई चुनौतियाँ।
उभरते बाजारों की उम्मीदें
जयशंकर ने कहा कि विशेष रूप से उभरते बाजारों के बीच यह उम्मीद बढ़ रही है कि BRICS वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने में मदद करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सदस्य देशों के बीच चर्चाएं वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार करने और साझा समाधान खोजने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं।
भारत की कूटनीतिक भूमिका
एस. जयशंकर का यह बयान भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका और BRICS के माध्यम से 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को बुलंद करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। BRICS ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित कर खुद को एक प्रभावी अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।
