भारत का रूसी तेल आयात: अमेरिका की छूट का भविष्य अनिश्चित
रूसी तेल पर निर्भरता में कमी का खतरा
यदि अमेरिका इस सप्ताहांत के बाद रूस से तेल खरीदने की दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाता है, तो भारतीय तेल रिफाइनरियों को रूसी कच्चे तेल का आयात कम करने की आवश्यकता हो सकती है। पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान युद्ध के कारण पहले से ही तेल की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है.
अमेरिका की छूट पर अनिश्चितता
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि 16 मई के बाद भारत सहित अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने की छूट जारी रहेगी या नहीं। यदि यह छूट समाप्त हो जाती है, तो भारतीय कंपनियों को अन्य देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है.
मई में रूसी तेल का रिकॉर्ड आयात
Kpler के आंकड़ों के अनुसार, मई में भारत ने प्रतिदिन लगभग 23 लाख बैरल रूसी तेल का आयात किया है, जो एक रिकॉर्ड है। इसका कारण यह है कि अमेरिका ने पहले से लोड किए गए रूसी तेल के आयात की अनुमति दी थी.
ईरान युद्ध का तेल बाजार पर प्रभाव
ईरान युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। फारस की खाड़ी से भारत जैसे बड़े खरीदार देशों तक तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर करता है.
भारत की तेल खरीद में विविधता
16 मई की समयसीमा से पहले, भारत की दो प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम ने इस सप्ताह पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका से कच्चा तेल खरीदा है.
रूस पर प्रतिबंधों का प्रभाव
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर तेल प्रतिबंध लगाए गए थे, जिससे मॉस्को पर दबाव बढ़ा। लेकिन ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आई, जिसके चलते अमेरिका को कुछ राहत देनी पड़ी.
