भारत और सायप्रस के बीच नई सामरिक साझेदारी की शुरुआत

भारत और सायप्रस के बीच संबंधों ने एक नया मोड़ लिया है, जब सायप्रस के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सामरिक साझेदारी की घोषणा की। यह कदम वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव और भारत की नई रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस साझेदारी को भविष्य उन्मुख बताया, जबकि रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर भी जोर दिया गया। जानें इस नई साझेदारी के विभिन्न पहलुओं और इसके दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में।
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भारत-सायप्रस संबंधों का नया अध्याय

भारत और सायप्रस के बीच संबंधों ने एक महत्वपूर्ण मोड़ लिया है। सायप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस की हालिया यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामरिक साझेदारी के स्तर पर लाने की घोषणा की। यह कदम वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव, भारत की नई रणनीति और पूर्वी भूमध्यसागर की राजनीति के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


प्रधानमंत्री मोदी का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और सायप्रस के बीच की मित्रता न केवल मजबूत है, बल्कि भविष्य की ओर उन्मुख भी है। उन्होंने लोकतंत्र, कानून के शासन और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दोनों देशों की साझेदारी का आधार बताया। मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है, जिससे सायप्रस के प्रति भारत का समर्थन और मजबूत हुआ है।


तुर्की के संदर्भ में संबंधों की मजबूती

भारत और सायप्रस की नजदीकी को तुर्की के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। तुर्की ने लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ रुख अपनाया है। इसके जवाब में, भारत ने पूर्वी भूमध्यसागर में सायप्रस और ग्रीस के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। भारत सायप्रस गणराज्य की संप्रभुता का समर्थन करता है और उत्तरी सायप्रस में तुर्क समर्थित शासन को मान्यता नहीं देता।


रक्षा और सुरक्षा सहयोग

इस यात्रा के दौरान, रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह बनाने का समझौता किया और 2026 से 2031 तक रक्षा सहयोग के लिए एक रोडमैप को अंतिम रूप दिया। समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।


समुद्री सहयोग का महत्व

भारत और सायप्रस के बीच समुद्री सहयोग का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि सायप्रस भूमध्यसागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर स्थित है। भारत ने इंडो-पैसिफिक महासागर पहल में सायप्रस को शामिल किया है, जिससे व्यापार संपर्क और समुद्री परिवहन क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा।


आर्थिक सहयोग की संभावनाएं

आर्थिक दृष्टि से, सायप्रस भारत में निवेश करने वाले शीर्ष देशों में से एक है। 2000 से अब तक, सायप्रस से भारत में लगभग 16 अरब डॉलर का निवेश हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने अगले पांच वर्षों में इस निवेश को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।


गिफ्ट सिटी में सायप्रस की भूमिका

गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने में सायप्रस की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों देशों के बीच पूंजी बाजार सहयोग समझौता हुआ है, और सायप्रस की कंपनी एलिनास फाइनेंस गिफ्ट सिटी में सूचीबद्ध होने वाली पहली विदेशी कंपनी बन चुकी है।


मध्य पूर्व और यूरोप के आर्थिक गलियारे में सायप्रस की भूमिका

भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के आर्थिक गलियारे में सायप्रस की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह गलियारा भारत को पश्चिम एशिया और यूरोप से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना है।


शिक्षा और संस्कृति में सहयोग

इस यात्रा के दौरान शिक्षा, संस्कृति, प्रौद्योगिकी, शोध और कूटनीतिक प्रशिक्षण से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा संवाद और अंतरिक्ष सहयोग दिवस मनाने की भी घोषणा की।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और सायप्रस की यह नई सामरिक साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।