भारत और मॉरीशस के बीच ऊर्जा सुरक्षा के लिए नया समझौता

भारत ने मॉरीशस के साथ ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते की घोषणा की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यात्रा के दौरान, यह समझौता हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और मॉरीशस के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। जानें इस नई साझेदारी के महत्व और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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भारत और मॉरीशस के बीच ऊर्जा सुरक्षा के लिए नया समझौता

भारत-मॉरीशस संबंधों में नई ऊंचाई

भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'सागर' (SAGAR) नीति को सशक्त करते हुए मॉरीशस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को एक नई दिशा दी है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नौवें हिंद महासागर सम्मेलन में भाग लेते हुए यह जानकारी दी कि भारत, मॉरीशस की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेल और गैस की आपूर्ति हेतु एक द्विपक्षीय समझौते पर काम कर रहा है।


जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट ने, जैसा कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम ने बताया, रणनीतिक साझेदारी के महत्व को उजागर किया है, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में। उन्होंने कहा, “हम सरकार-से-सरकार समझौते को अंतिम रूप दे रहे हैं, जो मॉरीशस के लिए ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण होगा।”


विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि एक भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम मॉरीशस की पहली तैरती सौर ऊर्जा परियोजना पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “भारत और मॉरीशस के बीच स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के अनुकूल समाधानों के क्षेत्र में एक व्यापक और सक्रिय साझेदारी है।”


जयशंकर की यह यात्रा और ऊर्जा सौदे की पहल यह दर्शाती है कि भारत, मॉरीशस को केवल एक मित्र देश नहीं मानता, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में इसे अपने सबसे विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। यह समझौता भविष्य में मॉरीशस की अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने और भारत के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने में सहायक होगा।