भारत और दक्षिण कोरिया के बीच नए समझौतों से मजबूत होंगे रिश्ते
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच हाल ही में हुए समझौतों ने दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ा है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की यह पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जो दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। जानें इस यात्रा के पीछे की रणनीतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में।
| Apr 20, 2026, 23:22 IST
भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों में नया अध्याय
सोमवार को भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब दोनों देशों ने आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने एक संयुक्त बयान भी जारी किया।
यह यात्रा दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत में पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति ली का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भले ही यह उनकी पहली यात्रा है, लेकिन भारत के प्रति उनका जुड़ाव पहले से ही स्पष्ट है।
प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम बताया। जानकारी के अनुसार, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार आधारित व्यवस्था और कानून के शासन पर समान दृष्टिकोण है। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भी दोनों देशों का दृष्टिकोण काफी मेल खाता है।
मोदी ने कहा कि पिछले दशक में दोनों देशों के रिश्ते और अधिक गहरे और सक्रिय हुए हैं, और अब इन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने चिप निर्माण, जहाज निर्माण, प्रतिभा और तकनीक, पर्यावरण और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों की खोज की बात की, जिससे दोनों देशों की प्रगति सुनिश्चित हो सके।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश मौजूदा लगभग 25 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार को 2030 तक लगभग 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने जहाज निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्त और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।
दोनों पक्षों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है, ताकि रिश्ते केवल सरकारी स्तर तक सीमित न रहकर आम जनता तक भी मजबूत हों।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक संबंधों को 2010 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद नई गति मिली थी, जिसके बाद व्यापार और निवेश में लगातार वृद्धि देखी गई है।
जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साझा प्रयासों के जरिए दोनों देश इस क्षेत्र में शांति और प्रगति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
