भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने की नई रूपरेखा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान में अपने समकक्ष शिगेरु इशिबा के साथ मिलकर भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए एक नई रूपरेखा पेश की। इस यात्रा के दौरान, दोनों नेताओं ने राज्य-प्रांत सहयोग को मजबूत करने और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतियों पर चर्चा की। मोदी ने व्यापार, नवोन्मेष और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं का उल्लेख किया। जानें इस महत्वपूर्ण वार्ता के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।
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भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने की नई रूपरेखा

प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को जापान के मियागी प्रांत के सेंडाई में एक सेमीकंडक्टर संयंत्र का दौरा किया। इस अवसर पर उनके साथ जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा भी मौजूद थे। दोनों नेताओं ने तोक्यो से सेंडाई तक की यात्रा बुलेट ट्रेन से की। मोदी शुक्रवार को दो दिवसीय यात्रा पर तोक्यो पहुंचे थे।


राज्य-प्रांत सहयोग को मजबूत करने की अपील

इससे पहले, मोदी ने तोक्यो में जापान के 16 प्रांतों के गवर्नरों से मुलाकात की। उन्होंने भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के तहत 'राज्य-प्रांत सहयोग' को मजबूत करने का आह्वान किया। जापान के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में एक बयान जारी किया। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "तोक्यो में आज सुबह जापान के 16 प्रांतों के गवर्नरों के साथ बातचीत की। राज्य-प्रांत सहयोग भारत-जापान मित्रता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।"


सुरक्षा सहयोग की नई रूपरेखा

पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, भारत और जापान ने समकालीन सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने रक्षा सहयोग को बढ़ाने की एक नई रूपरेखा पेश की। यह घोषणा तोक्यो में मोदी और इशिबा के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद की गई।


इस वार्ता में दोनों देशों के बीच 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को विस्तार देने पर जोर दिया गया। इस रूपरेखा के तहत, दोनों पक्षों ने सैन्य उपकरणों और प्रौद्योगिकी के सह-विकास और सह-उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा की।


क्वाड और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा

संयुक्त बयान में कहा गया है कि मोदी और इशिबा ने कानून के शासन पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने का संकल्प लिया। उन्होंने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। दोनों नेताओं ने क्वाड के एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय समूह के रूप में उभरने का स्वागत किया और इस साल के अंत में भारत में होने वाले समूह के अगले शिखर सम्मेलन के प्रति उत्सुकता व्यक्त की।


उन्होंने पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की और किसी भी एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ कड़ा विरोध जताया।


रक्षा सहयोग के विस्तार की योजना

मोदी ने कहा कि रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्षों के साझा हित हैं। उन्होंने कहा, "हमने रक्षा उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में अपने सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।"


नई रूपरेखा के तहत, भारत और जापान ने अपने रक्षा बलों के बीच तालमेल बढ़ाने का निर्णय लिया है। दोनों पक्षों ने संयुक्त अभ्यास की संभावनाओं पर विचार करने का भी निर्णय लिया है।


आतंकवाद और अंतरिक्ष सहयोग

रूपरेखा में आतंकवाद, चरमपंथी उग्रवाद और संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने का भी संकल्प लिया गया है। इसके अलावा, दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है।