भारत और जापान की बुलेट ट्रेन परियोजना में तेजी लाने का निर्णय

भारत और जापान ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस परियोजना के तहत, जापान की अगली पीढ़ी की E10 सीरीज़ शिंकानसेन ट्रेन के आने से पहले ही भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन का संचालन शुरू होगा। केंद्रीय रेल मंत्री ने 2027 में पहली बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने की घोषणा की है। जानें इस महत्वाकांक्षी परियोजना की समयसीमा और विस्तार के बारे में।
 | 
gyanhigyan

भारत-जापान बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति

भारत और जापान ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस योजना के तहत, जापान की नई पीढ़ी की E10 सीरीज़ शिंकानसेन ट्रेन के आने से पहले ही भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन का संचालन शुरू किया जाएगा। यह निर्णय दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत के पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को शीघ्रता से चालू करना है। जापान ने 2030 के दशक की शुरुआत में E10 सीरीज़ शिंकानसेन ट्रेनों को उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है, जब यह मॉडल उपयोग के लिए तैयार होगा।


निर्माण कार्य की प्रगति और समयसीमा

इस बीच, कॉरिडोर का निर्माण तेजी से चल रहा है, और पहले सेक्शन के 2027 में चालू होने की उम्मीद है। सेवाओं को शीघ्र शुरू करने के लिए, भारत और जापान ने तय किया है कि प्रारंभिक हिस्से का संचालन भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से किया जाएगा, जब तक कि E10 सीरीज़ की ट्रेनें उपलब्ध नहीं हो जातीं। यह व्यवस्था दोनों देशों के साझा लक्ष्य के अनुरूप है, जिससे हाई-स्पीड रेल संचालन को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।


बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का विस्तार

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत 15 अगस्त, 2027 से अपनी पहली बुलेट ट्रेन सेवा का पहला चरण शुरू करेगा। यह प्रारंभिक रूट 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर के सूरत-बिलीमोरा सेक्शन को कवर करेगा, और अन्य सेक्शन का निर्माण कार्य आगे बढ़ने के साथ-साथ चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और यह अपने निर्धारित समय पर शुरू होगा। एक बार पूरा होने पर, ट्रेनों की गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने की उम्मीद है, जिससे यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 7 मिनट रह जाएगा। इस परियोजना के लिए मुख्य रूप से जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से 'ऑफिशियल डेवलपमेंट असिस्टेंस' (ODA) लोन के माध्यम से फंडिंग की जा रही है। हालांकि, लगभग 90,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत का भार भारतीय रेलवे स्वयं उठाएगा, और जापान से और फंडिंग लेने की कोई योजना नहीं है।