भारत और ओमान के बीच आर्थिक साझेदारी समझौता 1 जून से लागू

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 1 जून से लागू होने जा रहा है। इस समझौते से भारतीय उत्पादों को ओमान के बाजार में टैरिफ-फ्री पहुंच मिलेगी, जिससे व्यापारिक संबंधों में मजबूती आएगी। जानें किन सेक्टरों को होगा लाभ और कैसे यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को प्रभावित करेगा।
 | 
भारत और ओमान के बीच आर्थिक साझेदारी समझौता 1 जून से लागू gyanhigyan

भारत और ओमान के बीच CEPA का आगाज़

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 1 जून से प्रभावी होने जा रहा है। इस समझौते की औपचारिक घोषणा सोमवार को की जाएगी। इस समझौते के लागू होने से भारतीय उत्पादों और सेवाओं को ओमान के बाजार में अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में मजबूती आएगी। यह नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला पांचवां मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है।


2025-26 में व्यापार आंकड़े

2025-26 में भारत और ओमान के बीच हुआ था 11.18 अरब डॉलर का व्यापार


भारत पहले ही मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ व्यापार समझौतों को लागू कर चुका है। इसके अलावा, भारत ने ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ भी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच 11.18 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 10.61 अरब डॉलर से अधिक है। इस दौरान भारत का निर्यात 4.02 अरब डॉलर और आयात 7.16 अरब डॉलर रहा।


भारत के लाभकारी सेक्टर

भारत के किन सेक्टरों का होगा फायदा


समझौते के तहत, भारत को ओमान के बाजार में 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर 100 प्रतिशत टैरिफ-फ्री पहुंच मिलेगी, जो कुल व्यापार मूल्य के 99.38 प्रतिशत हिस्से को कवर करती है। इससे भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी और निर्यात को नई गति मिलेगी। विशेष रूप से कपड़े, कृषि उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, जेम्स और ज्यूलरी, ट्रांसपोर्ट कंपोनेंट्स और प्रीसिजन इंस्ट्रूमेंट्स के निर्यात में वृद्धि की संभावना है।


अन्य लाभकारी क्षेत्र

मेटल, फार्मा और ऑटो सेक्टर को भी मिलेगा लाभ


इसके अतिरिक्त, आयरन और स्टील, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, मरीन प्रोडक्ट्स, इंडस्ट्रियल मशीनरी और कॉपर प्रोडक्ट्स को भी जीरो टैरिफ का लाभ मिलेगा। एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारतीय दवाओं और टीकों को ओमान में टैरिफ-फ्री एंट्री मिलेगी, जिससे भारतीय फार्मा उद्योग को बड़ा लाभ होने की उम्मीद है। भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए भी यह समझौता फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि गाड़ियों पर लगने वाली 5 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी समाप्त हो जाएगी।


पश्चिम एशिया में आर्थिक प्रभाव

पश्चिम एशिया क्षेत्र में मजबूत होगा देश का आर्थिक प्रभाव


सर्विस सेक्टर में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है। भारत का ओमान को सर्विस का एक्सपोर्ट 2020 में 39.7 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2024 में 66.5 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। टेलीकॉम, आईटी, ट्रांसपोर्टेशन और टूरिज्म इस क्षेत्र के प्रमुख हिस्से रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के पश्चिम एशिया क्षेत्र में आर्थिक प्रभाव को मजबूत करेगा, निर्यात बढ़ाएगा और निवेश के नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही, यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को भी मजबूती प्रदान करेगा।