भारत और ईरान के चाबहार परियोजना पर विदेश मंत्रालय की नई जानकारी
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर विदेश मंत्रालय ने हाल ही में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। भारत ने उन रिपोर्टों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि वह इस परियोजना से बाहर हो गया है। मंत्रालय ने बताया कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट पाने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। इसके अलावा, ईरान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा सलाह भी जारी की गई है। जानें इस परियोजना का महत्व और भारत की रणनीति क्या है।
| Jan 17, 2026, 08:16 IST
चाबहार परियोजना पर भारत का रुख
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर विदेश मंत्रालय ने 16 जनवरी 2026 को महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। भारत सरकार ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि भारत इस परियोजना से पीछे हट गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत इस परियोजना के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट प्राप्त करने के लिए अमेरिका के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी, जिससे चाबहार पोर्ट के विकास में भारत की भूमिका को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
भारत के हितों की सुरक्षा के लिए कदम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें परियोजना में जोखिम को कम करने के लिए अपने निर्धारित $120 मिलियन को स्थानांतरित करना शामिल है। एक अन्य विकल्प चाबहार के विकास को जारी रखने के लिए एक नई इकाई का गठन करना है, जिससे भारतीय सरकार का जोखिम न्यूनतम हो सके।
चाबहार का महत्व
भारत इस परियोजना के प्रति प्रतिबद्ध है क्योंकि यह रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है, जो भारत, ईरान, अफगानिस्तान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप को जोड़ता है।
ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
विदेश मंत्रालय ईरान में स्थिति पर ध्यान दे रहा है, जहाँ सरकार विरोधी प्रदर्शनों में 2,500 से अधिक लोगों की जान गई है।
भारतीयों के लिए यात्रा सलाह
चाबहार पर बातचीत के बीच, ईरान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने कुछ सख्त कदम उठाए हैं:
यात्रा न करने की सलाह: MEA ने भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है।
देश छोड़ने का निर्देश: जो भारतीय नागरिक पहले से ईरान में हैं (लगभग 9,000 लोग, जिनमें छात्र और पेशेवर शामिल हैं), उन्हें उपलब्ध व्यावसायिक उड़ानों के माध्यम से जल्द से जल्द ईरान छोड़ने को कहा गया है।
ट्रंप प्रशासन का प्रभाव: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद भारत के लिए यह 'डिप्लोमैटिक बैलेंसिंग' काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
भारत की स्थिति
फिलहाल, लगभग 9,000 भारतीय, जिनमें ज़्यादातर छात्र हैं, ईरान में रहते हैं। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है और वहाँ रहने वालों से उपलब्ध साधनों से देश छोड़ने का आग्रह किया है। जायसवाल ने ज़ोर देकर कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में है।
ईरान में अशांति ईरानी मुद्रा में गिरावट के बाद शुरू हुई, जो आर्थिक शिकायतों से राजनीतिक बदलाव की मांगों में बदल गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई जारी रखती है तो सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
भारत के लिए चाबहार न केवल व्यापारिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 26 अप्रैल 2026 की समयसीमा से पहले भारत का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्थायी कूटनीतिक समाधान निकालना है जिससे अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा टल जाए और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बाधित न हो।
