भारत और इक्वाडोर के बीच व्यापारिक सहयोग का नया अध्याय
भारत और इक्वाडोर के बीच व्यापारिक समझौता
भारत और इक्वाडोर एक प्रेफरेंशियल ट्रेड समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस सप्ताह विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी इक्वाडोर की समकक्ष गैब्रिएला सोमरफेल्ड रोसेरो के बीच हुई वार्ता का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना था।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि सोमरफेल्ड की भारत की दो दिवसीय यात्रा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में एक नया अध्याय शुरू किया है। 29 अप्रैल को हुई बातचीत में, जयशंकर और सोमरफेल्ड ने स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, व्यापार, निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक संबंधों, क्षमता निर्माण और बहुपक्षीय संस्थानों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराया। सोमरफेल्ड ने भारतीय पक्ष को औपचारिक पत्र सौंपा, जिसमें इक्वाडोर ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस में शामिल होने का निर्णय लिया।
समझौतों और परियोजनाओं पर चर्चा
जयशंकर और सोमरफेल्ड ने इक्वाडोर में 'क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स' के कार्यान्वयन के लिए भारत द्वारा दी जाने वाली अनुदान सहायता पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, भारत इक्वाडोर को पांच वर्षों में विभिन्न सामाजिक-आर्थिक विकास परियोजनाओं के लिए 12 करोड़ रुपए तक की अनुदान सहायता प्रदान करेगा। मंत्रालय ने कहा कि इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन से स्थानीय समुदायों का कल्याण और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सोमरफेल्ड ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से भी मुलाकात की, जहां दोनों नेताओं ने प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट के लिए एक रोडमैप पर चर्चा की। चर्चाओं में भारतीय फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात को बढ़ाने और तांबा व सोना जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सप्लाई चेन में साझेदारी पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
स्वास्थ्य सहयोग पर चर्चा
सोमरफेल्ड ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी मुलाकात की, जिसमें द्विपक्षीय स्वास्थ्य सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। इस चर्चा में किफायती स्वास्थ्य समाधानों और अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया गया। MEA ने बताया कि चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा उत्पादों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए एक संस्थागत तकनीकी तंत्र स्थापित करना था। इसमें जानकारी के आदान-प्रदान और नियामक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इक्वाडोर द्वारा 'इंडियन फार्माकोपिया' को मान्यता देने का भी प्रस्ताव शामिल था।
