भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों पर चर्चा

दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ भारत के मध्य पूर्व संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति, वीजा मुद्दों और आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस रुख पर अपने विचार साझा किए। इस बातचीत में भारत के हितों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया गया। जानें इस महत्वपूर्ण वार्ता के मुख्य बिंदुओं के बारे में।
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भारत के मध्य पूर्व संबंधों पर चर्चा

दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मिडिल ईस्ट के देशों के साथ भारत के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि "भारत उन कुछ देशों में से एक है जिनके अमेरिका, इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ मजबूत और सकारात्मक संबंध हैं। इसलिए, इस क्षेत्र में हमारे हित सीधे जुड़े हुए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लिए चुनौती यह है कि इन सभी संबंधों को एक साथ कैसे बनाए रखा जाए और अपने हितों की रक्षा कैसे की जाए। भारत इसे किसी खेल की तरह नहीं देखता जिसमें एक का लाभ दूसरे के नुकसान पर हो।


भारत के चार सिद्धांत

विदेश मंत्री ने अपने बयान में उन मुख्य सिद्धांतों का उल्लेख किया जिनके आधार पर भारत इस क्षेत्र में अपनी नीति निर्धारित करता है। उन्होंने कहा, 'भारत हमेशा इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सर्वोपरि है।'


उन्होंने आगे कहा, 'भारत अपनी आवश्यकताओं के लिए तेल और गैस इसी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में खरीदता है, इसलिए हम चाहते हैं कि ऊर्जा की कीमतें नियंत्रित रहें। भारत इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार को सुरक्षित और निर्बाध देखना चाहता है। हम चाहते हैं कि वहाँ के बाजार सभी के लिए खुले रहें और व्यापार पर कोई प्रतिबंध न हो।'


भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति

डॉ. जयशंकर ने यूक्रेन संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत दुनिया में किसी भी कठिन परिस्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत के हित लगातार बढ़ रहे हैं और हमारे पास विवाद में शामिल सभी पक्षों के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे 'मल्टी-अलाइनमेंट' कहा जाता है, क्योंकि आज भारत के हितों का दायरा इतना विस्तृत हो गया है कि हमें कई अलग-अलग संबंधों को एक साथ संभालना पड़ता है।


वीजा मुद्दे पर चर्चा

दोनों देशों के बीच संबंधों को इस रिश्ते की असली ताकत बताते हुए, डॉ. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने वीजा से जुड़ी समस्याओं को उठाया। उन्होंने कहा, "मैंने सेक्रेटरी रूबियो को उन कठिनाइयों के बारे में बताया जो वैध यात्रियों को वीजा प्राप्त करने में आ रही हैं। हम अवैध आवाजाही को रोकने के लिए अमेरिका का पूरा सहयोग करते हैं, लेकिन हमारी यह अपेक्षा भी है कि इससे सही तरीके से यात्रा करने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो। यह हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।"


आतंकवाद पर जीरो-टॉलरेंस नीति

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में, विदेश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कठोर रुख को फिर से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'जीरो-टॉलरेंस' है, यानी इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भारत और अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग की सराहना की। जयशंकर ने विशेष रूप से पिछले साल 26/11 मुंबई हमलों के एक मुख्य साजिशकर्ता को अमेरिका द्वारा भारत को सौंपे जाने का उल्लेख किया और कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अवैध व्यापार और आतंकवाद के खिलाफ अपने सहयोग को मजबूत करेंगे।