भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नई बातचीत की तैयारी

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर नई बातचीत की तैयारी चल रही है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस महीने वाशिंगटन जाने वाला है, जहाँ व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। अमेरिका के राजदूत ने सकारात्मक बैठक की जानकारी दी है, जिसमें दक्षिण और मध्य एशिया में व्यापार को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार किया गया। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होंगी। समझौते के तहत शुल्क में कमी और बड़े निवेश की योजनाएँ शामिल हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद पर भी संवेदनशीलता बनी हुई है।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नई बातचीत की तैयारी

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर गतिविधियाँ फिर से तेज हो गई हैं। हालिया जानकारी के अनुसार, इस महीने के अंत में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन का दौरा करेगा, जहाँ दोनों देशों के बीच व्यापार से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।




भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर के साथ एक सकारात्मक बैठक की है। इस बैठक में दक्षिण और मध्य एशिया में व्यापार को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार किया गया।




राजदूत ने यह भी बताया कि दोनों देशों ने पहले ही एक व्यापार समझौते पर सहमति व्यक्त की है और अब इसे आगे बढ़ाने के लिए बातचीत का अगला चरण शुरू होने वाला है। हालांकि, इस प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल नहीं होंगी, क्योंकि वह संसद सत्र में व्यस्त हैं, जहाँ महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित विधेयकों को पेश किया जाना है।




यदि हम पृष्ठभूमि पर नजर डालें, तो भारत और अमेरिका ने 2 फरवरी 2026 को इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की थी। उस समय दोनों देशों के नेताओं ने इसे ऐतिहासिक करार दिया था, लेकिन विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए थे।




मौजूदा जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत भारत पर लगने वाले शुल्क में बड़ी कमी की गई थी, जिसे 50 प्रतिशत से घटाकर लगभग 18 प्रतिशत तक लाया गया। इसके अतिरिक्त, अगले पांच वर्षों में भारत की ओर से अमेरिका में ऊर्जा, विमानन, धातु, कोयला और तकनीकी क्षेत्रों में बड़े निवेश की योजना भी शामिल है।




हालांकि, इस समझौते का एक संवेदनशील पहलू रूस से तेल खरीद को लेकर भी रहा है। समझौते के तहत भारत से रूसी तेल आयात को कम करने की बात कही गई थी, लेकिन ईरान से जुड़े हालिया तनाव के कारण कुछ मामलों में भारत को सीमित छूट दी गई है।