भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव: ट्रंप का कच्चे तेल पर चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी है कि यदि वह रूस से कच्चे तेल की खरीद को नियंत्रित नहीं करता है, तो अमेरिका टैरिफ बढ़ा सकता है। यह बयान उस समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। भारतीय बाजारों में भी इस बयान का असर देखने को मिला है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है और भारत को क्या कदम उठाने की आवश्यकता है।
| Jan 5, 2026, 23:20 IST
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में हालिया तनाव के संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को स्पष्ट किया कि यदि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद को नियंत्रित नहीं करता है, तो अमेरिका भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है।
ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की, लेकिन यह भी कहा कि उन्हें पता है कि अमेरिका भारत की नीतियों से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने व्यापार के संदर्भ में अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ाने की संभावनाओं का उल्लेख किया। यह बयान उस समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।
पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ को 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था, जिसमें से लगभग 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए थे। अमेरिका का यह दबाव रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के उद्देश्य से है।
ट्रंप के बयान का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। सोमवार को आईटी शेयरों में गिरावट आई और निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग ढाई प्रतिशत गिरकर एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों को चिंता है कि व्यापार तनाव बढ़ने पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और अधिक लटक सकता है।
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जो ट्रंप के करीबी माने जाते हैं, ने कहा कि रूस की तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों और भारत पर ऊंचे टैरिफ का असर पड़ा है। उन्होंने उन देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का समर्थन किया जो अभी भी रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं।
हालांकि, व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पहले से ही 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है और रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद न होने से वह एक रणनीतिक असमंजस में है। उनके अनुसार, भारत को अपनी नीति में स्पष्टता लानी होगी।
हाल के महीनों में भारत ने अमेरिकी दबाव के चलते रूसी तेल आयात में कुछ कमी की है, लेकिन इसे पूरी तरह से नहीं रोका गया है। सरकार ने रिफाइनरियों से रूसी और अमेरिकी तेल की साप्ताहिक खरीद का ब्योरा मांगा है ताकि अमेरिका की चिंताओं को दूर किया जा सके।
हालांकि भारी टैरिफ के बावजूद, नवंबर में भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़ा था, लेकिन मई से नवंबर 2025 के बीच कुल निर्यात में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट भी देखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच टैरिफ लागू होने के बाद कम से कम तीन बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन व्यापार समझौते पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
