भारत-अफ्रीका साझेदारी का महत्व: विदेश मंत्री जयशंकर का बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अफ्रीका साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि यह वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच स्थिरता और विश्वसनीयता का संदेश देती है। उन्होंने आगामी भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के संदर्भ में दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि यह साझेदारी न केवल विकास के लिए है, बल्कि एक बेहतर वैश्विक समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण है।
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भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के संदर्भ में भारत और अफ्रीका के बीच साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह साझेदारी एक अशांत विश्व में स्थिरता और विश्वसनीयता का संदेश देती है। आगामी भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन-IV (IAFS-IV) के लोगो, थीम और वेबसाइट के अनावरण के अवसर पर बोलते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों क्षेत्र केवल विकास के साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक बेहतर वैश्विक समाज के निर्माण में भी सहयोगी हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय कई संघर्षों का सामना कर रहा है, विशेषकर पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के संदर्भ में, जो 50 दिनों से अधिक समय से जारी है और जिसके वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ रहे हैं।


इस कार्यक्रम में अफ्रीकी महाद्वीप के राजदूतों और राजनयिकों ने भाग लिया, जहां आधिकारिक लोगो का अनावरण किया गया। इसमें भारत और अफ्रीका के नक्शों के ऊपर एक शेर का चित्रण किया गया है, जो ‘स्थायी साझेदारी, साझा दृष्टिकोण’ (Enduring Partnership, Shared Vision) की थीम और शिखर सम्मेलन की तारीख 28-31 जनवरी को दर्शाता है। जयशंकर ने आगामी शिखर सम्मेलन को ‘हमारे संबंधों को और मजबूत करने’ और एक ऐसी साझेदारी के लिए ढांचा तैयार करने का अनूठा अवसर बताया, जो अधिक महत्वाकांक्षी, समावेशी और भविष्य-उन्मुख हो। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया जटिल भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, यह सहयोग अस्थिरता में स्थिरता और कठिन समय में एकजुटता का संदेश देगा।


मंत्री ने आगे बताया कि भारत की विदेश नीति में अफ्रीका का केंद्रीय स्थान है। यह जुड़ाव समानता, आपसी सम्मान और सामूहिक प्रगति के सिद्धांतों पर आधारित है। भारत ने हाल के वर्षों में अफ्रीका में अपनी राजनयिक उपस्थिति को मजबूत किया है, 17 नए मिशनों के उद्घाटन के साथ कुल संख्या 46 तक पहुँच गई है। जयशंकर ने कहा कि यह विस्तार भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के ढांचे के तहत दीर्घकालिक साझेदारी का अगला चरण है। उन्होंने कहा कि यह संबंध हमारी सभ्यतागत कड़ियों में निहित है और सदियों के सांस्कृतिक तथा मानवीय आदान-प्रदान से विकसित हुआ है।


दोनों क्षेत्रों के स्वतंत्रता आंदोलनों के बीच समानताएं बताते हुए, जयशंकर ने कहा कि संघर्ष, एकजुटता, जुझारूपन और आकांक्षाओं का साझा इतिहास हमारी साझेदारी को आकार दे रहा है। उन्होंने बताया कि भारत का ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टिकोण और अफ्रीका का ‘एजेंडा 2063’ एक पूरक रोडमैप के रूप में कार्य करते हैं, जिनका उद्देश्य सतत और समावेशी विकास के माध्यम से समृद्धि प्राप्त करना है। मंत्री ने अफ्रीका को वैश्विक शासन में उसका उचित स्थान दिलाने के लिए भारत की निरंतर वकालत को भी रेखांकित किया। उन्होंने भारत की 2023 की G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को शामिल करने को एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो यह दर्शाता है कि ‘ग्लोबल साउथ की आवाज़ों को वैश्विक शासन को आकार देना चाहिए।’