भाजपा सांसद ने इंदिरा गांधी के आपातकाल की निंदा की
आपातकाल की कड़ी आलोचना
भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू किए गए आपातकाल की तीखी आलोचना की, जो 21 मार्च, 1977 को समाप्त हुआ था। उन्होंने इसे दमनकारी नीतियों, लोकतंत्र की हत्या और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन का एक काला अध्याय बताया। दुबे ने कहा कि इसी दिन, 21 मार्च 1977 को, इंदिरा गांधी की दमनकारी नीतियों के कारण लागू आपातकाल का अंत हुआ। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 20 मार्च 1977 को जनता ने गांधी परिवार के अहंकार को धराशायी कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं।
आपातकाल के दौरान के अत्याचार
दुबे ने आपातकाल के दौरान लाखों लोगों को जबरन जेल में डालने, हजारों लोगों की पुलिस हिरासत में मौत और 1 करोड़ लोगों की नसबंदी की घटनाओं की निंदा की। उन्होंने 42वें संवैधानिक संशोधन का उल्लेख किया, जिसने लोकसभा का कार्यकाल छह साल तक बढ़ा दिया और राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को कानूनी कार्यवाही से ऊपर का दर्जा दिया। इसके साथ ही, मौलिक अधिकारों का हनन और प्रेस पर प्रतिबंध लगाने की घटनाओं का भी जिक्र किया, जिससे संविधान में महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
संविधान में संशोधन और नसबंदी अभियान
दुबे ने अपनी पोस्ट में भारत के राजपत्र की एक तस्वीर साझा की, जिसमें आपातकाल के दौरान लागू किए गए संवैधानिक संशोधनों की सूची थी। उन्होंने न्यायिक समीक्षा और संस्थागत नियंत्रण को कमजोर करने वाले प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला। इसके अलावा, उन्होंने इंदिरा गांधी सरकार द्वारा शुरू किए गए सामूहिक नसबंदी और जनसंख्या नियंत्रण अभियान का भी उल्लेख किया। 19 मार्च को, दुबे ने कांग्रेस पार्टी को कई राष्ट्रीय समस्याओं की जड़ बताया, विशेषकर घुसपैठ के आरोपों पर जोर देते हुए।
राजनीतिक दृष्टिकोण
एक मीडिया चैनल से विशेष बातचीत में, दुबे ने कहा कि देश की राजनीति और किताबें पढ़ने के बाद, उन्हें विश्वास है कि आज की समस्याओं की जड़ नेहरू-गांधी परिवार या कांग्रेस पार्टी में है। इसी आधार पर उन्होंने 'कांग्रेस का काला अध्याय' नामक एक श्रृंखला शुरू की, जो 17 तारीख से आरंभ हुई।
