भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कच्चाथीवू द्वीप पर भारत के अधिकारों का मुद्दा उठाया
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कच्चाथीवू द्वीप को लेकर कांग्रेस और डीएमके पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों ने भारत के समुद्री अधिकारों का उल्लंघन किया है। दुबे ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल की सराहना की और मछुआरों की समस्याओं पर चिंता जताई। उन्होंने समझौते के दस्तावेजों का भी जिक्र किया और कहा कि इससे भविष्य में मछुआरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
| Mar 23, 2026, 14:41 IST
कच्चाथीवू द्वीप पर भारत के अधिकारों का सवाल
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस और डीएमके ने कच्चाथीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपकर भारत के समुद्री अधिकारों का उल्लंघन किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की प्रशंसा की और इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। दुबे ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं, जिसमें समझौते की एक प्रति भी शामिल है। इस समझौते में उल्लेख है कि पूरा समुद्री क्षेत्र, जिस पर भारत का अधिकार था, अब विवादित है। उन्होंने समझौते की तारीख 26 जून बताई।
इसके अतिरिक्त, दुबे ने बताया कि यह समझौता तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि के साथ मिलकर किया गया था। उन्होंने कहा कि उनके पास भारत सरकार की बैठकों से संबंधित करुणानिधि के साथ हुए समझौतों का विवरण है, और जो भी जानकारी चाहिए, वह उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक की सरकारों को मछुआरों के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
दुबे ने कहा कि 1976 और 1974 के समझौतों के बाद स्थिति यह बनी कि लाखों मछुआरे भारतीय समुद्र में जाते थे, लेकिन श्रीलंका उन्हें पकड़ लेता था। उन्होंने कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002-2003 में इस मुद्दे पर कुछ करने की कोशिश की, तो एक संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसे 2008 में पलट दिया गया। उन्होंने 2008 के संयुक्त बयान और 23 मार्च, 1976 के समझौते का उल्लेख किया और सवाल उठाया कि क्या इससे अधिक शर्मनाक कुछ हो सकता है। उन्होंने कहा कि मछुआरे अब भिखारी बन गए हैं और तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस को आगामी चुनावों में जनता को जवाब देना होगा।
दुबे ने चेतावनी दी कि इससे भविष्य में मछुआरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा और उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत के नियंत्रण वाला समुद्री क्षेत्र श्रीलंका के नियंत्रण में चला जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया नेहरू जी के समय से शुरू हुई थी और इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने इसे आगे बढ़ाया।
